न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
शहरवासियों को जाम से निजात दिलाने और उनके शहर तक आवागमन की राह सुगम बनाने के लिए ओवरब्रिज निर्माण पर बेशक प्रदेश सरकार ने 32 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। ओवरब्रिज चालू भी हो गया, लेकिन रोडवेज बस चालक मनमानी से बाज नहीं आ रहे। उन्हें अब भी बसों को शहर के अंदर से लाने-ले जाने में दिक्कत है, जबकि बाईपास की बजाय शहर के अंदर से बसें लाने-ले जाने में उनकी दूरी भी कम होगी और डीजल की भी बचत होगी।
अफसोस तो यह है कि हाल ही में रोडवेज के अधिकारी भी सभी डिपो की बसों को शहर के अंदर से लाने-ले जाने के लिए बाईपास के दोनों तरफ टीआई की तैनाती करने की बात भी कह चुके हैं, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला है। हाथरस को छोड़कर अन्य डिपो की बसें आज भी बाईपास से ही आवागमन कर रही हैं। अलीगढ़ और आगरा की तरफ से आने वाले यात्रियों को बाईपास पर ही उतारा जा रहा है, जिससे उन्हें शहर तक आने-जाने में अतिरिक्त समय और धन खर्च करना पड़ रहा है। कुल मिलाकर यात्रियों को ओवरब्रिज चालू होने के बावजूद खास राहत नहीं मिली है। डिपो के अधिकारी भी इससे अंजान बने हुए हैं।
उल्लेखनीय है कि दो साल पहले शहर के तालाब चौराहे पर ओवरब्रिज का निर्माण शुरू हुआ था। ओवरब्रिज निर्माण के चलते हाथरस व अलीगढ़ को छोड़कर सभी डिपो की बसें बाईपास से ही गुजरने लगीं। इस पुल के निर्माण पर सरकार ने करीब 32 करोड़ रुपये का खर्चा किया है। पुल पर आवागमन भी शुरू हो चुका है, लेकिन रोडवेज बसों के चालक-परिचालक अब भी बसों को अंदर से लाने-ले जाने से बच रहे हैं, जबकि शहर के मुकाबले बाईपास की दूरी भी ज्यादा है। संवाद
अभी ओवरब्रिज कुछ दिन पहले ही चालू हुआ है। अन्य डिपो के चालक-परिचालकों को इसकी जानकारी नहीं है। जल्द ही सभी डिपो के अधिकारियाें को पत्र लिखा जाएगा और उनसे रोडवेज बसों को शहर के अंदर से लाने-ले जाने के लिए चालक-परिचालकों को निर्देशित करने का अनुरोध किया जाएगा।
-शशीरानी, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक हाथरस
हाथरस और अलीगढ़ को छोड़कर अन्य डिपो की बसें बाईपास से गुजर रही हैं। ये बसें यात्रियों को बाईपास पर उतार देती हैं। इस कारण घर तक पहुंचना काफी मुश्किल हो रहा है। इस पर डिपो के अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए।
-राजेश कुमार, यात्री
हर माह दवा लेने के लिए आगरा जाते हैं। वैसे तो हम अपनी गाड़ी से जाते हैं। जब किसी कारण बस से जाना पड़े तो बसें बाईपास पर उतार देती हैं। इस कारण घर तक पहुंचने में काफी दिक्कत होती है। डिपो के अफसर अनजान बने हुए हैं।
-ऊषा पचौरी, यात्री
करोड़ों रुपये की लागत से ओवरब्रिज बनकर तैयार हो गया है। इसके बाद भी बसें बाईपास से गुजर रही हैं। आए-दिन बाईपास पर यात्रियों और परिचालकों में झगड़ा होता है। निगम के अफसरों को बसें शहर के अंदर से निकलवाने का इंतजाम करना चाहिए।
-कुलदीप कौशिक, यात्री।