न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
रोशनी के महापर्व का धनतेरस के साथ शुभारंभ हो गया है। दिवाली की खुशियां मनाने के लिए ब्रज की देहरी तैयार है। बाजार से लेकर घर तक झिलमिल रोशनी से जगमगा उठे हैं। शुक्रवार को बाजारों में दिनभर रौनक रही। शहर के मुख्य बाजारों में आकर्षक ढंग से दुकानों को सजाया गया है।
आचार्य बल्लभ जी ने बताया कि दिवाली के बारे में मान्यता है कि इस दिन समुद्र मंथन के समय महालक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। त्रेता युग में भगवान राम के वापस आने पर दीप जलाकर खुशी मनाई गई थी। शाम पांच बजकर 54 मिनट से सात बजकर पचास मिनट तक पूजन शुभ रहेगा। इस बार आयुष्मान योग, सौभाग्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, लक्ष्मी योग, वीणा योग बन रहा है।
गोवर्धन पूजन शोभन योग, विशाखा नक्षत्र
दिवाली के अगले दिन अन्नकूट पूजा होगी। यह 15 नवंबर को है। ब्रज में इसका खासा महत्व है। मान्यता है कि इंद्र ने एक बार कोप में आकर घनघोर वर्षा की। ब्रजवासियों को बचाने के लिए भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को धारण किया। अन्नकूट गिरिराज धरण की पूजा की जाती है भोग लगाया जाता है। उन्होंने बताया कि पूजन शाम पांच बजकर पचास मिनट से सात बजकर 46 मिनट तक होगी। इस दौरान शोभन योग, विशाखा नक्षत्र है।
भाई दूज के तिलक का मुहूर्त
भाईदूज का पर्व 16 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन भाई बहन यमुना में साथ स्नान करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति की अकाल मृत्यु नहीं होती है। जिले से भी काफी लोग मथुरा व वृंदावन यमुना स्नान के लिए जाते हैं। आचार्य बल्लभ जी ने बताया कि भाई दूज के दिन सुबह नौ बजकर 21 मिनट से 11 बजकर 26 मिनट तक, दोपहर एक बजकर 11 मिनट से दो बजकर 42 मिनट तक शुभ मुहूर्त में तिलक होगा।