संवाद न्यूज एजेंसी, सहपऊ।
रविवार की रात रजबहे की पटरी कटने के बाद पानी आसपास के खेतों में फैल गया है। इससे किसानों की फसलें लगभग नष्ट हो चुकी है। अब किसानों को खेतों से पानी निकालने और दोबारा बुआई कराने की चिंता सताने लगी है। खेतों में इतना ज्यादा पानी भर गया है कि किसान डीजल पंप सेट से इन पानी को निकलवा रहे हैं।
किसानों का कहना है कि पानी भरने से फसलें नष्ट हो गई है। अब इसमें दोबारा बुआई करनी होगी। आलू बोने के लिए तीन हजार रुपये एवं गेहूं के लिए 1500 रुपये प्रति बीघा के हिसाब से लगाई थी। जिन किसानों ने खेत बाकी पर लिए थे उन्हें लगभग आठ हजार रुपये लगानी पड़ी थी। खेतों में पानी भरने से यह लागत तो बेकार चली गई। अब किसान मुआवजे की आस लगाए बैठे हैं।
बता दें कि, रविवार की रात को सहपऊ रजबहे की पटरी कटने से गांव ढकपुरा, कस्बा सहपऊ, सेदरिया एवं सुल्तानपुर के किसानों की लगभग 300 बीघा आलू व गेहूं की फसलें पानी से डूब गई। प्रशासन ने पटरियों को ठीक तो करा दिया लेकिन, अभी तक खेतों से पानी नहीं निकल सका है।
एसडीएम विपन कुमार, नायब तहसीलदार राम गोपाल, प्रभारी कानूनगो पंकेश कौशिक एवं क्षेत्रीय लेखपाल रत्नेश कुमार ने भी मौके पर पहुंच कर जायजा लिया। प्रभारी कानूनगो एवं क्षेत्रीय लेखपाल ने नुकसान का आकलन करना शुरू कर दिया है। अब किसानों को सरकारी मदद का इंतजार है। मंगलवार को कुछ किसान एसडीएम से मिलने तहसील सादाबाद भी गए हुए थे।
- मैंने 31 बीघा खेत बाकी पर लिया था, उसमें गेहूं बोया था। गेहूं ठीक तरह से निकले भी नहीं थे कि उसमें रजबहे का पानी भर गया। पानी निकलवा रहे हैं, जिससे उसमें दोबारा से गेहूं बोया जा सके। - श्यामवीर, गांव सुल्तानपुर
- मैंने बाकी पर खेत लेकर कुछ में गेहूं कुछ में आलू बोये थे। खेत रजबहे के पटरी के साथ ही थे। इसलिए पटरी कटने से फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई। अब उसे दोबारा बोने के लिए किसी से कर्जा ही लेना पड़ेगा। - हरी मोहन, गांव सेदरिया
- मैंने पांच बीघा में आलू की फसल बोई थी। रजबहे के पानी भरने से वह पूरी तरह नष्ट हो गई। अब उस खेत में से पानी निकलवा रहा हूं। दूसरी फसल बोनी है काफी नुकसान हुआ है। सरकार से मदद मिल जाए तो अच्छा ही होगा। - रामवीर शुक्ला, गांव ढकपुरा