संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
कोरोना की तीसरी लहर की आशंका बढ़ती जा रही है लेकिन जिले में इससे निपटने के लिए न तो पर्याप्त चिकित्सक हैं और न ही संसाधन। आरटीपीसीआर जांच लैब यहां शुरू तो हो गई है लेकिन वहां न तो पर्याप्त किट हैं और न ही पूरा स्टाफ। ऐसे में काफी नमूने जांच के लिए अन्य जिलों को भेजे जा रहे हैं। हालांकि अधिकारी यह दावा कर रहे हैं कि कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम हैं।
बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर में जिले में सबसे ज्यादा किल्लत ऑक्सीजन की हुई थी। ऐसे में जिले में अब ऑक्सीजन के तीन प्लांट लगाए गए हैं। इसमें एमडीटीबी हॉस्पिटल के निकट एक प्लांट स्थापित किया गया है। साथ ही मुरसान के सीएचसी और सिकंदराराऊ के सीएचसी पर भी ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए हैं।
जिले में कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए एमडीटीबी अस्पताल एल टू श्रेणी का है, जबकि सासनी, मुरसान, हसायन व सिकंदराराऊ में एल-वन श्रेणी के अस्पताल बनाए गए हैं। सासनी, मुरसान, सिकंदराराऊ व हसायन में 30-30 बेड की व्यवस्था है, जबकि एमडीटीबी अस्पताल में 40 बेड की पीकू यूनिट तैयार की गई है।
पिछले दिनों जिला अस्पताल में आरटीपीसीआर लैब की शुरुआत हो गई थी। इसमें जांचें तो शुरू हो गई हैं लेकिन यहां अभी पर्याप्त स्टाफ नहीं है। साथ ही जांच किटें भी पर्याप्त नहीं है। ऐसे में काफी नमूनों की जांच अभी भी आगरा से ही कराई जा रही हैं। जिले में सबसे ज्यादा किल्लत चिकित्सकों की है।
बागला जिला अस्पताल में महज आठ चिकित्सकों की तैनाती है। जबकि यहां चिकित्सकों के 25 पद सृजित हैं। इसी तरह देहात के सरकारी अस्पतालों में है। वहां 110 की अपेक्षा 70 चिकित्सक हैं। ऐसे में तीसरी लहर से निपटने के लिए सबसे ज्यादा किल्लत चिकित्सकों की है।
- कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम हैं। आरटीपीसीआर जांच के लिए प्रयोगशाला शुरू हो गई है। पर्याप्त बेड हैं और पीकू वार्ड भी तैयार हैं। ऑक्सीजन प्लांट लगाए जा चुके हैं। -
डॉ. सीएम चतुर्वेदी, सीएमओ, हाथरस।