संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
साल 2021 में जिले में सियासी उथल-पुथल मची रही। राजनेताओं का आधा साल पंचायत चुनाव की गतिविधियों में बीत गया तो आधा साल वर्ष 2022 विधानसभा चुनाव की तैयारी में। पंचायत चुनाव में जनता ने कई बड़े नेताओं को आइना भी दिखाया। कुछ नेताओं का कद भी इस चुनाव में तय हो गया। वहीं साल के आखिरी महीनों में विस चुनाव की तैयारी में सभी दल लगे रहे। सभी प्रमुख दलों में टिकट के लिए दावेदार अपनी जुगत लगाते रहे।
हालांकि, बसपा ने जरूर जिले की तीनों सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए। साल 2021 में जिले की कई राजनीतिक घटनाक्रम हुए। आधे साल तक पंचायत चुनाव का शोर मचता रहा। ब्लॉक प्रमुख से लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में जमकर समर्थन मूल्य भी चला। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ओमवती यादव, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विनोद उपाध्याय जैसे कई नेता जिला पंचायत सदस्य का चुनाव भी नहीं जीत सके।
पंचायत चुनाव में पार्टी नहीं प्रत्याशियों को व्यक्तिगत आधार पर वोट ज्यादा मिले। जिला पंचायत अध्यक्ष का पद फिर रामवीर उपाध्याय के परिवार के पास पहुंचा। उनकी पत्नी सीमा उपाध्याय जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं। जब वह जिला पंचायत में सदस्य बनी तो भाजपा ने उन्हें इस पद के लिए प्रत्याशी भी बनाया। रालोद, सपा समर्थित प्रत्याशी शशि चौधरी ने उन्हें जोरदार टक्कर दी और मुकाबले को रोमांचक बना दिया।
कई पुराने ब्लॉक प्रमुख या उनके परिजन इस बार भी ब्लॉक प्रमुख बने तो कई नए चेहरे भी पंचायत चुनाव में सामने आए। पंचायत चुनाव के बाद राजनेता विस चुनाव की तैयारी में जुट गए। सभी दलों ने लगातार सम्मेलन और सभाएं की। इसमें भाजपा सबसे आगे रही। राजनेताओं ने विभिन्न दलों से दावेदारी भी की।
बसपा ने अगले साल होने वाले चुनाव के लिए इस साल प्रत्याशी भी घोषित कर दिए। सादाबाद से डॉ. अविन शर्मा, हाथरस से संजीव काका और सिकंदराराऊ से अवधेश कुमार सिंह बसपा के प्रत्याशी घोषित हो गए हैं। अन्य दलों में दावेदार अपनी टिकट के लिए जुगत लगाते नजर आए।
जेठानी और देवरानी का मुकाबला भी रहा चर्चाओं में
पंचायत चुनाव में इस बार जेठानी और देवरानी के बीच भी रोमांचक मुकाबला देखने को मिला। जिला पंचायत सदस्य के रूप में सीमा उपाध्याय के सामने उनकी देवरानी रितु उपाध्याय मुकाबले में रही। इसमें हालांकि सीमा उपाध्याय को जीत हासिल हुई। यह मुकाबला खासा चर्चित भी रहा।
कुछ नेताओं ने बदले पाले, तो कुछ ने की घर वापसी
कई नेताओं ने इस बार पाले बदले तो कई ने घर वापसी की। बसपा के निलंबित विधायक व पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय का पूरा परिवार इस साल भाजपा में शामिल हो गया। हालांकि उपाध्याय के अस्वस्थ होने के कारण उनके बारे में साल के अंत तक कोई घोषणा नहीं हो सकी। वहीं डॉ. अविन शर्मा ने भाजपा छोड़कर बसपा का दामन थाम लिया।
बसपा ने उन्हें सादाबाद की सीट से प्रत्याशी बना दिया। इसी तरह पूर्व एमएलसी डॉ. राकेश सिंह राना, पूर्व विधायक अमर सिंह यादव, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामवती बघेल, पूर्व प्रत्याशी ब्रजमोहन राही सहित कई नेताओं ने सपा का दामन थाम लिया। बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष दिनेश देशमुख के अलावा राजपाल सिंह पुनियां जैसे कई नेताओं की बसपा में वापसी हो गई।