न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिले के लिए यह गौरव की बात है कि यहां के निवासी आर्यान पेशवा राजा महेंद्र प्रताप के नाम पर अलीगढ़ में विश्वविद्यालय स्थापित हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को इसका शिलान्यास करने आ रहे हैं। यहां के उद्यमियों ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि वह यहां के परंपरागत उद्योग-धंधों के लिए पैकेज घोषित करें।
उल्लेखनीय है कि शहर में रंग, गुलाल, हींग, आयुर्वेद दवाएं, रेडीमेड गारमेंट, हैंफ्डीक्राफ्ट आदि उद्योग-धंधे हैं। देहात में भी कई परंपरागत उद्योग-धंधे हैं, जोकि अब दम तोड़ चुके हैं, इसलिए लोगों की मांग है कि भले ही पीएम अलीगढ़ में आ रहे हैं तो यहां के विकास के लिए भी कोई बड़ी घोषणा कर जाएं। संवाद
प्रधानमंत्री यहां के विकास के लिए भी कोई घोषणा कर जाएं। कॉरिडोर बनने से हाथरस को फायदा होगा। चारों तरफ का एरिया विकसित होगा। कम से कम 10 साल इसका प्रभाव लोगों व व्यापारियों को दिखेगा। हाथरस को भी डिफेंस कॉरिडोर में शामिल किया जाए।
-देवेंद्र मोहता, अध्यक्ष औद्योगिक संस्थान हाथरस
विश्वविद्यालय बनने से हाथरस को लाभ होगा। राजा महेंद्र प्रताप हाथरस जिले के निवासी थे। उम्मीद है कि हाथरस जिले के लिए भी पीएम कोई घोषणा करेंगे और यहां के उद्योग-धंधों को फिर से संजीवनी मिलेगी।
-कपिल अग्रवाल, उद्यमी
सौभाग्य की बात है कि राजा महेंद्र प्रताप हमारे जिले के हैं। अब उनके नाम पर विश्वविद्यालय बन रहा है। इसका फायदा हाथरस के लोगों को मिलेगा। पीएम राजा साहब का जिला होने के कारण यहां भी कोई सौगत दें तो उद्योग धंधों का पुराना स्वरूप लौट सकता है। -राजेश अग्रवाल, उद्यमी।
राजा साहब के नाम पर विश्वविद्यालय बनाए जाने से खुशी
हाथरस। देश की आजादी के लिए विदेशों में रहकर जंग लड़ने वाले आर्यान पेशवा राजा महेंद्र प्रताप के नाम पर अलीगढ़ में विश्वविद्यालय का शिलान्यास होने से यहां के लोगों में खुशी है। राजा साहब ने 32 साल विदेशों में रहकर आजादी की जंग लड़ी थी और वहां हिंद सरकार की स्थापना की।
आजादी के योद्धा राजा महेंद्र प्रताप का जन्म मुरसान नरेश बहादुर घनश्याम सिंह के यहां एक दिसंबर 1886 को हुआ था। बाद में उन्हें हाथरस नरेश राजा हरनारायण ने गोद ले लिया। मात्र 20 वर्ष की अवस्था में पिता का देहांत होने के बाद हाथरस की विरासत पर राजा महेंद्र प्रताप की ताजपोशी हुई, लेकिन राजा महेंद्र प्रताप के विचार शुरू से अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ थे। यही कारण था कि अंग्रेजों ने उन्हें राजा बहादुर की उपाधि नहीं दी। आजादी के इस योद्धा ने वर्ष 1957 से लेकर 1962 तक मथुरा लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। 1979 में उनका इंतकाल हो गया। आर्यान पेशवा समाज सुधारक थे। उन्होंने एएमयू की स्थापना के लिए जमीन दान की थी। यहीं वर्ष 1909 में उन्होंने वृंदावन में प्रेम महाविद्यालय की स्थापना की थी। यह तकनीकी शिक्षा का केंद्र था। उन्होंने प्रेम धर्म भी चलाया और इसी नाम पर राष्ट्र पत्र भी निकाला। आजादी के बाद राजा साहब ने कई चुनाव लड़े। 1957 में लोकसभा चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को मथुरा में चुनाव भी हराया था। इस चुनाव में अटल जी की जमानत जब्त हो गई थी। इधर, मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके नाम पर विश्वविद्यालय का शिलान्यास करेंगे। इससे लोगों में काफी खुशी है। संवाद