शहीद चंदन सिंह की पत्नी को प्रमाण पत्र सौंपते डिप्टी कमांडेंट राजवीर सिंह। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी, सादाबाद।
क्षेत्र के गांव खेड़ा बरामई निवासी बीएसएफ के जवान चंदन सिंह की शहादत को 19 साल बाद पहचान मिली है। शनिवार को बीएसएफ के डिप्टी कमांडेंट ने उनकी पत्नी को ऑपरेशनल कैजुअल्टी प्रमाण पत्र सौंपते हुए सर्वोच्च बलिदान के लिए सैल्यूट किया। चंदन 2003 में मणिपुर में उग्रवादी हमले में शहीद हो गए थे।
मणिपुर में तैनाती के दौरान 10 फरवरी 2003 को आरक्षक चंदन सिंह आरओपी ड्यूटी के लिए नामित किए गए थे। इस दौरान उग्रवादियों ने भूमिगत हमला कर दिया। उग्रवादी की गोलीबारी का चंदन सिंह ने बहादुरी से जवाब दिया। सिर और पैर में गोली लगने के कारण घटनास्थल पर ही चंदन सिंह वीरगति को प्राप्त हो गए।
डिप्टी कमांडेंट राजवीर सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार ने अर्धसैनिक बलों में सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों को भी शहीद की उपाधि देने और आश्रित परिवार को सुविधाएं देने का निर्णय लिया है। आश्रित को सीमेंट कंपनी की ओर से 4000 वर्ग फीट के मकान निर्माण के लिए मुफ्त सीमेंट भी उपलब्ध कराया जाएगा। शहीद चंदन सिंह के पिता रामदयाल वर्मा, भाई चौधरी हिम्मत सिंह ने इसके लिए केंद्र सरकार का आभार जताया। बलवीर फौजदार, ओमप्रकाश गौतम, तूहीराम वर्मा, रामसनेही, रामकुमार ने कहा कि आज चंदन के शहादत को पहचान मिल गई।