गौरव भारद्वाज, हाथरस।
महिलाओं को वाहन चलाते देखना पहले हैरत होती थी, लेकिन अब यह बीते दिनों की बात हो गई है। बदलते परिवेश में महिलाएं तेजी से आत्मनिर्भर हो रही हैं। समाज में आई जागरूकता और महिला वर्ग के नौकरी पेशे से जुड़ने के कारण उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। यही कारण है कि अब रोजमर्रा के कामों में हाथ बंटाने वाली महिलाएं अब कोई भी वाहन आसानी से चला रही हैं।
बाकायदा वाहनों का अपने नाम पर रस्ट्रिेशन करा ड्राइविंग लाइसेंस भी बनवा रही हैं। जिले की महिलाओं में मिशन शक्ति अभियान से नई ऊर्जा का संचार हो रहा है। महिलाओं में चार पहिया व दो पहिया वाहन चलाने का क्रेज बढ़ा है। 3347 महिलाएं खुद वाहनों का संचालन करने के साथ फर्राटा भर रही हैं।
एक साल पहले शुरू हुए इस अभियान में अधिकारी जागरूक प्रहरी की भूमिका निभा रहे हैं। महिलाओं में अधिकारों के प्रति जागरूकता भी आई है। महिलाओं को जागरूक करने के लिए स्कूल-कॉलेजों व अन्य स्थानों पर कार्यक्रम में आयोजित किए जा रहे हैं।
3347 महिलाएं जिले में खुद चलाती हैं वाहन
जिले में वर्तमान में दो लाख से अधिक वाहन सड़कों पर डगर तय कर रहे हैं। एआरटीओ कार्यालय से अब तक 3347 महिलाओं ने चार पहिया व दो पहिया वाहन चलाने का लाइसेंस लिया है। महिलाएं इन वाहनों से दफ्तर जाना या अन्य जरूरी काम निपटा रही हैं।
चार दीवारी से निकल किया बाहर का रुख
रोडवेज बसों में हर रोज सैकड़ों महिला यात्री सफर करती हैं। जबकि बस में महिलाओं के लिए तीन की सीट आरक्षित होती हैं। वहीं रोडवेज के बेड़े में पूर्व में मृतक आश्रित कोटे से तीन महिला परिचालकों की तैनाती हुई। ये महिलाएं वर्तमान में सुबह से शाम तक आगरा अलीगढ़ रूट पर यात्रियों को ईटीएम की मदद से टिकट उपलब्ध करा रही हैं।
- मैंने बीते महीने एआरटीओ कार्यालय से ड्राइविंग लाइसेंस लिया है। अब स्कूटी व कार के जरिए अपने परिवार के कामकाजों को खुद निपटा रही हूं। घर से बाहर निकलकर काम करने में काफी अच्छा लगता है।
सोनाली शर्मा, युवती चालक।
- मैने स्कूटी को लेने के साथ ड्राइविंग लाइसेंस लिया है। मिशन शक्ति के तहत सरकार महिलाओं को जागरूक कर रही है। यह बहुत अच्छा कदम है। जब तक जागरूक नहीं होंगी, तब तक समाज में तरक्की नहीं कर सकती हैं। - इशिता शर्मा, चालक।
- मिशन शक्ति अभियान से महिलाएं काफी जागरूक हुई हैं। अब तक कार्यालय से 3347 महिलाओं ने चार पहिया व दो पहिया वाहन चलाने का लाइसेंस लिया है। यदि कोई महिला ट्रक चलाना जानती है तो उसे प्राथमिकता के आधार पर ड्राइविंग लाइसेंस जारी किया जाएगा।
नीतू सिंह, एआरटीओ प्रशासन।
- मिशन शक्ति अभियान से महिलाओें में काफी जागरूकता आई है। हमारे यहां तीन महिलाएं परिचालक हैं। जो आगरा-अलीगढ़ रूट की रोडवेज बसों में कार्यरत हैं। इसके अलावा सरकार ने पिंक बस सेवा आदि का क्रियान्वयन किया है।
शशी रानी, एआरएम हाथरस डिपो।
सोनाली शर्मा। संवाद- फोटो : HATHRAS
इंशिता शर्मा। संवाद- फोटो : HATHRAS