न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
चीन से युद्ध के हालात के बीच भारतीय बाजार में खिलौनों की आवक कम हो गई है। पीएम खिलौना उद्योग से अर्थव्यवस्था में जान फूंकने पर जोर दे रहे हैं, जिससे स्थानीय खिलौना विक्रेताओं की उम्मीदों को भी पंख लगे हैं। उनका कहना है कि यदि भारतीय बाजार में खिलौनों का उत्पादन बढ़े तो निश्चित ही खिलौनों की लागत कम होगी और इनका बाजार मूल्य भी चीनी खिलौनों के मुकाबले कम रहेगा। शहर के दुकानदारों को खिलौना बाजार में बिक्री बढ़ने की उम्मीद है।
उल्लेखनीय है कि बीते दिनों मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि जिन कामों को हम छोटा समझ रहे हैं, आज विश्व स्तर पर उनकी मांग अधिक है। विश्व स्तर पर खिलौना बाजार सात लाख करोड़ रुपये का है। इसमें भारत की भूमिका बिल्कुल न के बराबर है। खिलौना बनाना भारत के लिए आर्थिक दृष्टि से अच्छा विकल्प हो सकता है।
इसके बाद खिलौना कारोबारियों का उत्साह बढ़ गया है। दुकानदार खिलौनों का उत्पादन बढ़ने की उम्मीद भी जता रहे हैं। यदि भारतीय खिलौनों का उत्पादन बढ़ता है शहर के दुकानदार यह कह रहे हैं कि खिलौने सस्ते होंगे, क्योंकि चीन से खिलौना आने से कई कई तरह के कर लगने के कारण इनके दाम भी बढ़ जाते हैं। वैसे भी ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंर्ड्स के तहत खिलौने चेक होकर आएंगे तो 30 प्रतिशत रेट और बढ़ना तय है।
पीएम मोदी ने खिलौना का उत्पादन बढ़ाने की बात कही है। इससे खिलौने बनाने में वृद्धि होना तय है। अपने देश में ही बनने से खिलौने सस्ते होंगे, क्योंकि चीन से यहां तक आने में कई कर लगते हैं और खिलौनों का दाम बढ़ जाता है। 100 रुपये का खिलौना बाजार में आते-आते 500 रुपये का हो जाता है।
-संजय अग्रवाल, दुकानदार
पीएम मोदी खिलौना बाजार को बढ़ाने की बात कह रहे हैं। इससे खिलौना बाजार में बढ़ोतरी होगी। खिलौने सस्ते होने से खरीदने में काफी राहत मिलेगी। खिलौना बाजार देश के अंदर रोजगार बढ़ाने का भी एक सशक्त माध्यम बन सकता है।
-शिवम, ग्राहक।