हाथरस। समय के साथ त्योहारों को मनाने का तरीका भी बदलता जा रहा है। पहले टेसू के रंगों से खेली जाने वाली होली आज हर्बल और रासायनिक रंगों से रंगीन होती है। रेडीमेड होने के कारण आज भी होली खेलने के लिए लोगों का ज्यादा रुझान रासायनिक और हर्बल रंगाें की तरफ है। पुराने समय में टेसू के रंगों की होली खेली जाती थी। प्राकृतिक होने के कारण यह रंग त्वचा को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते थे। खासकर बृजांचल में टेसू के रंगों से होली खेलने का रिवाज था।
होली की मस्ती के लिए विख्यात बृज मंडल की देहरी कहे जाने वाले इस शहर के लोग कोरोना की दहशत से उबरने के बाद खुलकर होली खेलने के लिए उत्साहित हैं। यही वजह है कि इस बार रंग और गुलाल की खूब खरीदारी हो रही है। पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार रंग, गुलाल और पिचकारियों की दुकानें भी ज्यादा सजी हैं। इन पर लग रही खरीदारों की भीड़ होली को लेकर उनके उत्साह को बयां कर रही है। होली के माहौल में टेसू फूल के प्राकृतिक रंगों की याद न आए, ऐसा कैसे हो सकता है।
बृज मंडल में टेसू के फूलों के रंग से होली खेलने का खास रिवाज हुआ करता था। दो-तीन दिन पहले से लोग इन फूलों को पानी के बड़े बर्तन में घोलकर रखते थे और होली के दिन इसकी खूब बौछार करते थे। वर्तमान में जिन रंगों से होली खेली जाती है, उन्हें बनाने में कई तरह के रसायनों का प्रयोग किया जाता है। रसायनयुक्त यह रंग त्वचा को बेहद नुकसान पहुंचाते हैं। अगर होली खेलनी है और त्वचा की रक्षा करनी है तो टेसू के फूल से बेहतर कोई विकल्प हो ही नहीं सकता। संवाद
होली पर बरतें ये सावधानियां
1. होली के दिन पूरी तरह शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। कपड़े ऐसे हों, जिनसे शरीर में रासायनिक रंगों को जाने से रोका जा सके।
2. होली खेलने से पहले शरीर पर तेल लगा लें। 15 मिनट शरीर को तेल सोखने का मौका दें।
3. रंगों से बचाने के लिए बालों पर विशेष ध्यान दें। बालों में अच्छी किस्म का तेल लगाएं। टोपी भी लगा सकते हैं। होठों को फटने से बचाने के लिए लिप क्रीम का इस्तेमाल करेंगे तो बेहतर होगा।
4. नाखूनों पर रंग चढ़ने के बाद जल्दी साफ नहीं होता है, इसलिए नाखूनों पर वैसलीन लगाएं। महिलाएं नेल पॉलिश लगा सकती हैं।
5. होली पर रंग खरीदते समय ध्यान रखें, रंग गहरा और सस्ता न हो। हरा, बैंगनी, लाल रंग न खरीदकर हल्के रंग खरीदें।
रासायनिक रंगों से नुकसान
रासायनिक रंगों के प्रयोग के समय सावधानी बरतें, क्योंकि इससे त्वचा के साथ आंखों को भी भारी नुकसान हो सकता है। त्वचा रोग विशेषज्ञ भी लोगों को चंद रुपये बचाने के लिए अच्छे रंग प्रयोग के लिए कह रहे हैं। सबसे अच्छा तरीका प्राकृतिक रंगों के प्रयोग का है। चिकित्सकों के अनुसार रासायनिक रंग त्वचा पर बुरा प्रभाव डालते हैं, जिससे आंखों की रोशनी जाने का खतरा है, जबकि शरीर पर एलर्जी के अलावा अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं।
बदलते समय में लोगों का रुझान टेसू के फूलों की ओर बढ़ा है। टेसू के फूलों से कई तरह के रंग तैयार किए जा सकते हैं। इस बार केमिकल युक्त रंगों के प्रति लोगों का रुझान कम दिख रहा है। 50 रुपये प्रति किलो फूल बिक रहे हैं।
- पल्लव माहेश्वरी, फूल विक्रेता
टूसे के फूलों को भिगोने के बाद जो रंग तैयार होता है, उसमें बहुत अच्छी महक आती है। रसायनयुक्त रंगों से जितना बचा जाए, उतना बचना चाहिए। रसायन युक्त रंगों से इन्फेक्शन का ज्यादा खतरा रहता है, इसलिए टेसू के फूल खरीद रहे हैं।
- गगन पंडित, ग्राहक
पहले लोग रसायनयुक्त रंगों के बारे में जानते नहीं थे। टेसू के फूलों से कई-कई दिन तक रंग तैयार होता था। इससे होली खेलने का आनंद ही अलग है। बदलते समय में लोग आधुनिकता की ओर भाग रहे हैं। इस बार टेसू के फूलों का रंग तैयार कर होली खेली जाएगी।
- जगदीश शर्मा ग्राहक