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हाथरस : ऑक्सीजन के लिए वन विभाग रोपेगा पीपल के पौधे

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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कोरोना काल में जिस तरह ऑक्सीजन की किल्लत के चलते बड़ी संख्या में मरीजों ने जान गंवाई, उससे लोगों को एक बार फिर पेड़-पौधों की महत्ता समझ में आ गई है। इस बार वन विभाग द्वारा पौधरोपण अभियान के तहत पीपल के पौधे अधिक संख्या में रोपने की तैयारी की जा रही है। बीते दिनों जिले के 200 से अधिक ग्राम प्रधानों को भी वन विभाग की तरफ से एक कार्यक्रम के दौरान पीपल के पौधे दिए गए थे।
बात यदि पौधों की करें तो नीम का पेड़ पौधा पर्यावरण को साफ रखने में मदद करता है। ये एक तरह से नेचुरल एयर प्यूरीफायर है। ये वातावरण में मौजूद गंदगी को साफ करता है। इससे हवा में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है। जामुन के बीज तो फायदेमंद हैं, लेकिन इस पेड़ को कम न समझें। जामुन का पेड़ सल्फर और नाइट्रोजन जैसी गैसों को शुद्ध बनाता है।
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बरगद के पेड़ की एक खासियत है कि ये पेड़ कितनी ऑक्सीजन बनाएगा, ये बात इसकी छाया पर निर्भर करता है। यानि जितना बड़ा और घना पेड़ होगा, उतनी ज्यादा ऑक्सीजन मिल पाएगी। अशोक का पेड़ भारी मात्रा में ऑक्सीजन का निर्माण कर पर्यावरण में छोड़ता है। इसे लगाने से न सिर्फ ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है, बल्कि ये पेड़ दूषित गैसों को भी सोख कर शुद्ध बनाता है।
अर्जुन का पेड़ न सिर्फ ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने में मदद करता है, बल्कि दूषित गैसों को शुद्ध बनाता है। पीपल का पेड़ किसी अन्य पेड़ की तुलना में 10 प्रतिशत ज्यादा ऑक्सीजन देता है, इसलिए वन विभाग का पीपल के पौधे लगाने पर ज्यादा जोर दे रहा है।
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पर्यावरण का अर्थ है पौधों से ढका हुआ आवरण, इसलिए लोग नीम, बरगद, अशोक, अर्जुन, पीपल आदि प्रजातियों के पौधे रोपें। प्रत्येक मनुष्य अपने जीवन में पांच पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल करें, ताकि हमारे पर्यावरण में ऑक्सीजन की प्रचुर मात्रा रहे। -एसआर ओझा, क्षेत्रीय वन अधिकारी
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