अपने परिवार के साथ शादाब अली। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी, सहपऊ/सादाबाद।
मौत को करीब से देखने के बाद हंगरी के रास्ते घर लौटे उस्मानगंज के शादाब ने बताया कि वह विन्नित्सा मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। 24 फरवरी की सुबह अचानक धमाका हुआ और चारों तरफ सायरन बजने लगे। धमाके में नजदीकी एयरपोर्ट की हवाई पट्टी भी ध्वस्त हो गई।
इसके बाद उन्होंने दोस्त और यूनिवर्सिटी स्टाफ के साथ मिलकर बॉर्डर की तरफ निकलने का निर्णय लिया। सभी लोग रोमानिया बॉर्डर की तरफ निकल पड़े थे। यहां प्रवेश के लिए काफी मारामारी थी। इसलिए वह अपने कुछ दोस्तों के साथ हंगरी बॉर्डर पहुंचे।
शादाब ने बताया कि इस दौरान उनके ऊपर फाइटर प्लेन उड़ रहे थे। सायरन बज रहे थे और बंकर में जाने के निर्देश मिल रहे थे। इन सबके बीच वे बस से निकले। हंगरी बॉर्डर पर नाइजीरियन छात्रों की ज्यादा भीड़ थी। टिकट के लिए लाइन में लगे कई लोग बेहोश हो गए। यूक्रेन नागरिक की सलाह पर वह पैदल ही हंगरी में प्रवेश कर गए।
मदद के लिए उन्होंने हंगरी में भारतीय दूतावास से संपर्क किया। उनके पास खाना पीना सब कुछ खत्म हो चुका था। कई घंटे इंतजार के बाद भारतीय दूतावास के लोग उनकी मदद के लिए पहुंचे। यहां मौजूद मीडिया कर्मियों से शादाब ने उनके दोस्त, जो कोमा में है कि खबर प्रकाशित करने को कहा लेकिन मीडिया ने उनका साथ नहीं दिया।
इस सब को लेकर दोस्तों के साथ शादाब ने हंगामा भी किया। इसलिए उन्हें सबसे पहले वहां से भारत जाने के लिए भेज दिया गया। शादाब ने कहा कि भारत सरकार ने कुछ नहीं किया। दूतावास के अधिकारियों ने बच्चों को मुसीबत में छोड़ दिया था। भारतीय तिरंगे ने उनकी मदद की है।