न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
कोरोना ने इस बार भी रेडीमेड गारमेंट्स कारोबार की कमर तोड़ दी है। कोरोना कर्फ्यू के चलते बाजार बंद है। ईद पर भी बाजार बंद रहे और शादियां भी धूमधाम से नहीं हो सकीं। ऐसे में बाजार में रेडीमेड कपड़ों की मांग तेजी से घटी है और कारोबारियों को करोड़ों की चपत लगी है। इस कारोबार से जुड़े मजदूरों को भी खासा आर्थिक नुकसान सहना पड़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि हाथरस में रेडीमेड गारमेंट की करीब 100 फैक्टरियां हैं। इसमें आठ से दस हजार लोग काम करते हैं। यहां से दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान सहित कई प्रांतों में माल जाता है। बीते महीने में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के चलते कोरोना कर्फ्यू लग गया।
गारमेंट्स कारोबारियों ने यह सोचा था कि इस बार पिछले साल का घाटा पूरा हो जाएगा, लेकिन अचानक कोरोना संक्रमण बढ़ने की वजह से प्रदेश में कोरोना कर्फ्यू लगा दिया गया। इस कारण रेडीमेड गारमेंट्स कारोबार की रफ्तार पर फिर ब्रेक लग गया। फैक्टरियां बंद होने से श्रमिकों को काम के लाले पड़ गए हैं। गारमेंट कारोबार से जुड़े लोग अब भुुखमरी के कगार पर है। साथ ही लाखों रुपये की उधारी भी फंसी हुई है।
- सहालग के सीजन में लॉकडाउन से रेडीमेड गारमेंट्स कारोबार को खासा नुकसान हुआ है। इस कारोबार से जुड़े लोग भुखमरी के कगार पर है। फैक्टरियां बंद पड़ी हुई हैं। कारोबार को खासा नुकसान हुआ है।
- राजेश अग्रवाल, कारोबारी
-पिछले साल लॉकडाउन में सोचा था कि राष्ट्रीय आपदा है। इस साल हालत सुधर जाएंगे, लेकिन इस साल भी स्थिति नहीं सुधरी और कारोबार का ढर्रा गड़बड़ा गया। कारोबार बंद होने से काफी दिक्कतें आ रही है।
- सुरेश अग्रवाल, गारमेंट कारोबारी।