न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जनपद न्यायाधीश सुनील कुमार सिंह प्रथम के निर्देश पर नगला भुस स्थित वृद्ध आश्रम में ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। इसमें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव चेतना सिंह ने वृद्धों के अधिकार, भरण-पोषण और निशुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने के संबंध में जानकारी दी।
अधीक्षक मुकेश कुमार व सहायक अधीक्षिका शिवानी श्रीवास्तव की मौजूदगी में सचिव ने बताया कि यदि किसी पुत्र ने अपने माता-पिता का भरण-पोषण नहीं किया जाता है तो उसके विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है। भरण-पोषण के संबंध में वृद्धों को बताया कि वर्ष 2007 में एक नये अधिनियम का गठन किया गया है। इसके अंतर्गत जिन माता-पिताओं की अनदेखी हो और संतानहीन वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण का प्राविधान किया गया है। इसके तहत गठित न्यायालय के समक्ष याचिका दायर करने की तिथि से 90 दिनों के भीतर राहत दिलवाने का प्राविधान है।
उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसी प्रकार की कानूनी सहायता की आवश्यकता हो तो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से नि:शुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। वरिष्ठ नागरिकों को रेलवे टिकट और हवाई टिकट में छूट मिलती है। बैंकों में वृद्धाजनों के लिए अलग से लाइन होती हैं, जिससे वृद्ध व्यक्तियों को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो। न्यायालयों में लंबित मुकदमों में वृद्धजनों के मुकदमों को वरीयता के आधार पर सुना जाता है। उन्होंने भरण-पोषण अधिनियम, विवाह अधिनियम एवं महिलाओं की संपत्ति में अधिकार के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि महिलाएं अपने पति से अपने गुजारा भत्ता के लिए भरण-पोषण अधिनियम धारा 125 के अंतर्गत पाने के अधिकारी हैं।