न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
पोषण माह के पहले दिन गांव दयालपुर में पोषण वाटिका में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) आरबी भास्कर ने पौधरोपण किया। सीडीओ ने कहा कि दही से दो गुना अधिक प्रोटीन, गाजर से चार गुना अधिक विटामिन ए, दूध से चार गुना अधिक कैल्शियम और संतरे से सात गुना अधिक विटामिन सी पाया जाता है। सहजन का पौधा हर घर में होना चाहिए। बच्चों और गर्भवती महिलाओं में कुपोषण को खत्म करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी डीके सिंह ने कहा कि जन्म से छह वर्ष के बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं किशोरी बालिकाओं में कुपोषण कम करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा सितंबर महीने को पोषण माह के रूप में मनाए जाने का निर्णय लिया गया है। पूरे महीने के चार सप्ताह के लिए अलग-अलग कार्यक्रम शासन स्तर से नियत किए गए हैं। माह के दौरान कुपोषित बच्चों के प्रबंधन के साथ जागरूकता के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि प्रथम सप्ताह में जिले के समस्त आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण वाटिका लगाई जाएगी, जिसमें सहजन, नींबू, अमरूद, पपीता और आंवला के पौधों के साथ हरी और पत्तेदार सब्जियां भी बोई जाएंगी। दूसरे सप्ताह में सुपोषण के लिए योगा और आयुष के महत्व पर गोष्ठियों एवं वेबिनार का आयोजन किया जाएगा। तीसरे सप्ताह में स्थानीय खाद्य पदार्थों की पौष्टिकता सुरक्षित रखने और उनसे तैयार किए जाने वाले पौष्टिक व्यंजन पर आधारित कार्यक्रम होंगे।
माह के चौथे सप्ताह में गंभीर अति कुपोषित बच्चों की पहचान और उनके लिए विशेष आहार संबंधित कार्यक्रम और व्यंजन प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। वर्तमान में जिले में कुल 42,951 गर्भवती धात्री महिलाएं, 1,78,404 बच्चे और 1,174 किशोरी-बालिकाएं पंजीकृत हैं, जिसमें 1078 बच्चे अति कुपोषित श्रेणी में चिन्हित हैं। इन्हें छह माह के अंदर सामान्य श्रेणी में लाने का प्रयास किया जाएगा। संवाद