पुलिस अभी विवाद का पता लगाने का प्रयास कर रही है, लेकिन प्रारंभिक जांच व घटनास्थल गांव के निकट होने के कारण आशंका जताई जा रही है कि हमलावर गांव समदपुर के ही हैं। बताते हैं कि रंजिश के चलते अखिलेश गांव नहीं जाते थे। गांव के कुछ युवकों के भी नाम सामने आ रहे हैं। इसी दिशा में जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने समदपुर में दबिश दी हैं। सूत्रों के अनुसार कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है।
पुलिस की जांच में सामने आ रहा प्रेम संबंधों का विवाद
घटना के पीछे पुरानी रंजिश बताई जा रही है, लेकिन मूल वजह स्पष्ट नहीं हो चुकी है। रिश्तेदार चुप्पी साधे हुए हैं। पुलिस की प्रारंभिक जांच में किसी प्रेम संबंध का विवाद सामने आया है, लेकिन पुलिस अभी पुख्ता तौर पर कुछ भी कहने से बच रही है।
पुलिस के अनुसार मृतक पर विभिन्न धाराओं में छह मुकदमे दर्ज हैं। इनमें मारपीट और जानलेवा हमले से संबंधित मामले हैं। छानबीन में सामने आया है कि पिछले पांच-छह साल से विवाद चल रहा था। संभावना है कि पुलिस की जांच में सामने आए प्रेम संबंध के कारण ही यह विवाद उत्पन्न हुआ है।
पोस्टमार्टम हाउस पर रिश्तेदारों ने अखिलेश की शादी को भी पांच से छह साल ही बताए हैं, लेकिन कोई इसकी पुष्टि नहीं कर रहा है। इसके अलावा पुलिस की छानबीन में किसी हिस्ट्रीशीटर के भी शामिल होने की बात सामने आई है। एसपी चिरंजीवनाथ सिन्हा का कहना है कि पिता के आने और हमलावरों के पकड़े जाने के बाद ही कुछ स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है।
फूफा लाल सिंह ने बताया कि अखिलेश की कई बार घेराबंदी हो चुकी थी। उन्हें लगातार धमकियां भी दी जा रहीं थीं। रिश्तेदारों ने बताया कि उनको झूठे मुकदमों में फंसाकर परेशान किया जा रहा था। मथुरा से आए बुआ के बेटे ने बताया कि अखिलेश को गांव के ही एक परिवार ने धमकाया था कि वह गांव में न झांकें।
तीन पीढ़ियां, तीनों अकेले
फूफा लाल सिंह ने बताया कि अखिलेश के पिता देवेंद्र सिंह का कोई भाई नहीं है। देवेंद्र सिंह के बेटे अखिलेश भी इकलौते थे। वहीं अखिलेश पर भी एक ही बेटा है, जो तीन साल का है।
जिला पंचायत अध्यक्ष को किया फोन
शाम तक पोस्टमार्टम न होने के कारण रिश्तेदारों ने जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा उपाध्याय को फोन कर घटना की जानकारी दी। सीमा उपाध्याय पोस्टमार्टम हाउस पहुंचीं। यहां बिलखते रिश्तेदारों को सांत्वना दी। रिश्तेदारों ने बताया कि तीन बजे शव यहां आ गया था, लेकिन शाम तक पोस्टमार्टम नहीं हो सका है। इस संबंध में उन्होंने पहले डीआईजी और फिर एडीजी लॉ एंड ऑर्डर से बात की।
फॉरेंसिक टीम ने की छानबीन
घटना के बाद मौके पर पहुंची डॉग स्क्वायड व फॉरेंसिक टीम ने जांच की। गाड़ी के हैंडल व अन्य संभावित स्थानों से फिंगर प्रिंट उठाए गए। पुलिस आसपास के सीसीटीवी कैमरे भी खंगाल रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हमलावर पांच से छह थे और सभी के चेहरे पर ढंके थे।
अखिलेश की हत्या की खबर परिजनों को फोन पर मिली। पिता देवेंद्र सिंह घटना के समय जम्मू में अपनी बेटी के पास थे। पत्नी निधि बच्चे के साथ आगरा कैंट स्थित क्वार्टर पर थी और दो बहनें दिल्ली में थीं। फोन पर खबर मिलते ही परिजन फफक पड़े।
इगलास के गांव पिलखुनिया से पोस्टमार्टम गृह पहुंचे फूफा लाल सिंह वर्मा ने बताया कि अखिलेश तीन बहनों में इकलौते थे। बड़ी बहन की शादी हो चुकी है और उनके जीजा भी फौज में हैं। वह जम्मू में तैनात हैं। बहन के ऑपरेशन के बाद पिता देेवेंद्र कुछ दिन पहले ही जम्मू गए थे। मां संगीता गांव में अकेले रह रहीं हैं। दोनों छोटी बहनें दिल्ली में पढ़ाई कर रहीं हैं। पुलिस ने जेब से मिले आधार कार्ड से शव की शिनाख्त की। इसके बाद गांव में खबर आग की तरह फैल गई।
सूचना पर गांव पिलखुनिया में रहने वाली दोनों बुआ आशा देवी व राधा रानी और मथुरा से तीसरी बुआ रीता अपने परिवार के साथ पोस्टमार्टम हाउस पहुंचीं। अन्य रिश्तेदार भी यहां आ गए। पोस्टमार्टम हाउस में शव देख तीनों बुआ का रो-रोकर बुरा हाल था। रिश्तेदारों ने जैसे-तैसे उन्हें संभाला। बड़ी बुआ आशा देवी रोते-रोते बेहोश हो गईं। रिश्तेदार हमलावरों को कोस रहे थे, लेकिन किसी ने रंजिश की विस्तृत जानकारी नहीं दी। कुछ संभावित हमलावरों के नाम बताए जो गांव समदपुर के ही बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट दर्ज करने व अन्य औपचारिकताओं के लिए पुलिस पिता के आने का इंतजार कर रही है।
पुलिस ने आगरा कैंट में किया संपर्क
घटना के बाद मिले पहचान पत्र के आधार पर पुलिस ने आगरा कैंट में अखिलेश के अधिकारियों से बात की। वहां से पता चला कि वह कोर्ट में तारीख का हवाला देते हुए एक दिन की छुट्टी लेकर आए थे।