गौरव भारद्वाज, हाथरस।
जिले के 162 लोगों ने वीआईपी बनने के लिए 14 लाख 97 हजार रुपये खर्च कर दिए। इन लोगों ने यह रुपये अपनी गाड़ी के नंबर वीआईपी लेने में खर्च किए हैं। उल्लेखनीय है कि जिले की सड़कों पर अलग-अलग सीरीज के दो लाख से अधिक वाहन डगर भर रहे हैं।
एक अप्रैल 2020 से अब तक जिले के लोगों ने खुद को वीआईपी की सूची में शामिल करने के लिए 14 लाख 97 हजार रुपये खर्च कर दिए हैं। इन लोगों ने एआरटीओ कार्यालय से मन माफिक नंबर लिए हैं। इसकी एवज में नियत राशि जमा की है। अब राजस्व को बढ़ाने के लिए शासन स्तर से वीआइपी नंबर महंगे कर दिए गए हैं।
उसके बाद कोरोना काल आ गया। इस कारण लोगों पर पैसे की कमी हो गई। यह भी एक कारण है कि वीआईपी नंबर लेने वालों की संख्या में इजाफा नहीं हुआ है। अब सहालगों की शुरुआत व दिवाली पर वाहनों की बिक्री के साथ इस साल वीआईपी की सूची में इजाफा हो सकता है।
इस मामले में एआरटीओ प्रशासन नीतू सिंह का कहना है कि अप्रैल से अब तक जिले के 162 लोगों ने वीआईपी नंबर के लिए आवेदन किया था। जिनको नंबर दे दिए गए हैं। कोरोना काल के चलते वीआइपी नंबर लेने वालों की संख्या में कमी आई है।