हाथरस। बीते वर्ष आलू का अच्छा भाव मिलने के बाद किसान ने इस बार आलू की पैदावार के लिए क्षेत्रफल तो बढ़ा दिया, लेकिन इस बार मौसम के परिवर्तन ने आलू की पैदावार को 12 से 15 फीसदी तक प्रभावित किया है। आलू का भाव भी किसान को सही नहीं मिल रहा। ऐसे में किसान आलू की फसल को लेकर काफी परेशान है।
पिछले साल 45,360 हजार हेक्टेअर में आलू की पैदावार हुई थी और आलू का भाव भी किसान को उम्मीद से ज्यादा अच्छा मिला। यही वजह है कि इस बार फिर अच्छे मुनाफे की आस में किसान ने जिले में 48,520 हजार हेक्टेअर क्षेत्रफल में आलू की बुवाई की है, लेकिन इस बार मौसम किसानों के लिए खलनायक बन गया है।
मौसम में कई बार हुए उतार-चढ़ाव के कारण इस वर्ष आलू की पैदावार में पिछले वर्ष के मुकाबले 12 से 15 फीसदी तक की गिरावट आने का अनुमान है, जबकि इस बार फसल में किसान ने लागत भी ज्यादा लगाई है, लेकिन उसके मुकाबले आलू का बाजार मूल्य किसान के मनमाफिक नहीं है। यही वजह है कि किसान इस बार खुदाई के बाद आलू को बाजार में उतारने की बजाय कोल्ड स्टोरों में पहुंचा रहे हैं, ताकि कीमतें सुधरने के बाद इस आलू को बेचकर मुनाफा कमाया जा सके।
आलू की अच्छी पैदावार के लिए सुबह से शाम तक खेत में काम किया। सोचा था अच्छा भाव मिलेगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अब हम अपने आलू को कोल्ड स्टोर में रखने को मजबूर हैं। इसके अलावा इस बार आलू की पैदावार भी पिछले साल की अपेक्षा 12 से 15 फीसदी तक प्रभावित हुई है।
-प्रदीप शर्मा, किसान
सरकार आलू के लिए भी मंडी बनाए। आलू की फसल की अधिकारी अनदेखी कर रहे हैं। कोल्ड स्टोर में रखकर भाड़े का खर्चा करने को मजबूर हैं। किसानों को सरकार लाभ नहीं दे पा रही है। आलू किसान को हर तरफ से नुकसान है। अच्छे समय के इंतजार में हम कोल्ड स्टोर में आलू रख रहे हैं।
-रवेंद्र रावत, किसान
किसानों से जानकारी मिल रही है कि आलू की पैदावार कुछ कम हुई है। इसके लिए मौसम परिवर्तन जिम्मेदार है। इस बार मौसम जल्दी ही गर्म हो गया है। इसके अलावा कई बार मौसम में काफी उतार-चढ़ाव हुआ है। इस कारण आलू की पैदावार प्रभावित हुई है।
एचएन सिंह, उप कृषि निदेशक