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Hathras News: बोर्ड के अधिकार हस्तांतरित करने के मामले में शासन सख्त

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नगर पालिका परिषद हाथरस बोर्ड के संविधानिक अधिकारों को छीनने के आरोप के मामले को शासन ने गंभीरता से लिया है। पहली बोर्ड की बैठक में पहला ही प्रस्ताव निविदा व भुगतान के अधिकार सीधे पालिकाध्यक्ष को हस्तांतरित करने का रखा गया था। सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कराने के बाद अधिकार हस्तांतरित हो गए थे। बोर्ड के अधिकार व शक्तियां हस्तांतरित किए जाने पर सभासदों की शिकायत का संज्ञान लेते हुए शासन ने डीएम को इस पर कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया है।
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नगर पालिका की कार्यप्रणाली से कई सभासद असंतुष्ट हैं। वार्ड 27 के सभासद नवीन सबलोक ने चार सितंबर को मंडलायुक्त व विहित प्राधिकारी अलीगढ़ मंडल से इस प्रकरण में शिकायत की थी। इसके साथ ही प्रमुख सचिव नगर विकास व निदेशक स्थानीय निकाय से भी शिकायत की गई थी। नवीन सबलोक ने अपनी शिकायत में नगर पालिका द्वारा निविदाओं व उनके भुगतान में की जा रही मनमानी का आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। सभासद ने बताया कि 15 जून 2023 को पहली मासिक बोर्ड की बैठक हुई थी। इसमें पहला ही प्रस्ताव निविदाओं व वित्तीय अधिकारों से संबंधित था, जिसका उनके अलावा सभासद रामजीलाल वर्मा, मनीष अग्रवाल व सुनील अग्रिहोत्री ने भी विरोध किया था। लेकिन उस प्रस्ताव को पूर्ण कार्यकाल के लिए बहुमत दर्शा कर पास करा लिया गया था।



नवीन सबलोक व सुनील अग्रिहोत्री ने बताया कि 15वें वित्त आयोग, राज्य वित्त आयोग, बोर्ड फंड, अवस्थापना निधि, स्टांप शुल्क आदि के कार्यों की टेंडर व भुगतान स्वीकृति का अधिकार अध्यक्ष को दे दिया गया, जबकि नगर पालिका अधिनियम 1916 में इस तरह के अधिकार हस्तांतरण पर पूर्ण रोक है। इस संबंध में दो फरवरी 2007 को शासनादेश भी जारी हुआ था। आरोप है कि मनमाने ढंग से काम कराने के लिए बोर्ड के संविधानिक अधिकार छीने गए। नवीन ने बताया कि तब से अधिकतर निविदाएं या उससे संबंधित भुगतान अब बोर्ड की बैठक में नहीं रखे जाते हैं। शासनादेश के उल्लंघन की शिकायत का संज्ञान लेते हुए अनु सचिव उत्तर प्रदेश शासन ने डीएम को नियमानुसार कार्यवाही के लिए निर्देशित किया है।
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बोर्ड फंड व राज्य वित्त के अधिकार बोर्ड के समक्ष ही रखे जाते हैं। 15वें वित्त के कार्यों की स्वीकृृति जिला स्तरीय कमेटी से मिलती है। 2007 के शासनादेश की जानकारी नहीं है। सभी कार्य नियमानुसार ही कराए जाते हैं।
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रोहित सिंह, ईओ नगर पालिका।
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