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Hathras: अखिलेश की जनसभा के मंच पर कोने में मिली कुर्सी, पूर्व विधायक ने छोड़ी सपा, BSP को समर्थन देने का एलान

Thu, 02 May 2024 07:48 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

अमर सिंह यादव सिकंदराराऊ से दो बार विधायक रह चुके हैं। पहली बार वह सपा-बसपा गठबंधन से विधायक निर्वाचित हुए थे। दूसरी बार उन पर ब्लॉक प्रमुख चुनाव में बवाल करने पर रासुका लगी थी। 11 माह वह जालौन जेल में बंद रहे थे। जेल से रिहा होने के बाद हुए चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी की हैसियत से लड़े और चुनाव जीता।
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सपा छोड़ने का ऐलान करते पूर्व विधायक अमर सिंह यादव बीच में - फोटो : संवाद
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विस्तार
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सिकंदराराऊ के पूर्व विधायक अमर सिंह यादव ने उपेक्षा से आहत होकर 2 मई को समाजवादी पार्टी से नाता तोड़ लिया। उन्होंने बसपा प्रत्याशी को समर्थन देने का एलान कर दिया है। 

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हाथरस मार्ग स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में पूर्व विधायक अमर सिंह यादव ने कहा कि सपा अध्यक्ष अखिलेश की जनसभा के दौरान सपा नेताओं समेत खुद पार्टी अध्यक्ष ने उनकी उपेक्षा की थी। इससे आहत होकर उन्होंने सपा से पूर्ण रूप से संबंध विच्छेद कर लिया है। उन्होंने कहा कि 29 अप्रैल को नगर पालिका के क्रीड़ास्थल में अखिलेश यादव की जनसभा को सफल बनाने के लिए उन्होंने पूरी ताकत लगा दी थी। सभा के दौरान मंच पर उनकी कुर्सी एक कोने में लगवा दी गई। जब अखिलेश मंच पर आए तो उन्होंने उनकी नमस्कार तक स्वीकार नहीं की, जबकि पूरे संबोधन के दौरान वह अखिलेश के समीप खड़े रहे। बाद में उनको देखकर भी अखिलेश ने अनदेखा किया। 
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पूर्व विधायक ने कहा कि इतना अपमान उनका जीवन में कभी नहीं हुआ। उनके समर्थक भी इससे खासे नाराज दिखे। समर्थकों के आग्रह पर उन्होंने सपा छोड़कर बसपा का समर्थन करने का निर्णय लिया है। अब वह पांच दिन में सपा को अपनी ताकत का अहसास करा देंगे। इस मौके पर जिलाध्यक्ष बसपा बनी सिंह जाटव, मनोज पंडित, आबिद अली, रतनलाल वाल्मीकि, सतीशचंद्र गौतम, सोनू बघेल, राघवेंद्र चौधरी, हेमंत कुमार आदि थे।
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दो बार विधायक रह चुके हैं अमर सिंह
अमर सिंह यादव सिकंदराराऊ से दो बार विधायक रह चुके हैं। पहली बार वह सपा-बसपा गठबंधन से विधायक निर्वाचित हुए थे। दूसरी बार उन पर ब्लॉक प्रमुख चुनाव में बवाल करने पर रासुका लगी थी। 11 माह वह जालौन जेल में बंद रहे थे। जेल से रिहा होने के बाद हुए चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी की हैसियत से लड़े और चुनाव जीता। जले से रिहा होने के बाद उनके पक्ष में जबर्दस्त हवा चली, जिसके चलते उन्होंने विधायक यशपाल सिंह चौहान को पराजित किया था। इसी कार्यकाल में उन्होंने प्रदेश की बसपा सरकार को समर्थन दिया था।

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