सिकंदराराऊ क्षेत्र के पिपल गांव में वर्ष 1947 में किए गए करीब दो हजार बीघा जमीन के पट्टा आवंटन की फाइलें कलेक्ट्रेट के रिकार्ड रूम से गायब हो गई हैं। न्यायालय द्वारा आठ बार रिकॉर्ड मांगे जाने के बाद इन फाइलों की तलाश शुरू हुई तो पूरा मामला सामने आया। इस मामले में एक अफसर सहित दो बाबुओं पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार 24 जुलाई को हुई जन सुनवाई के दौरान बाबू ललित कुशवाहा ने यह फाइलें अपनी सुपुर्दगी में ली थीं। न्यायालय की सख्ती के बाद जब इन फाइलों को खोजा गया तो कहीं नहीं मिलीं। अधिकारियों ने बाबू ललित कुशवाहा और राजकुमार व्यास को तलब कर अल्टीमेटम दे दिया है कि समय रहते अगर फाइलें नहीं मिली तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डीएम अतुल वत्स ने इस मामले की जांच एडीएम न्यायिक प्रकाश चंद्र को सौंपी है। फिलहाल दोनों बाबुओं से तत्काल फाइलें प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। बताया जा रहा है कि तीन दिन से लगातार कलेक्ट्रेट के रिकार्ड रूम में यह फाइलें खोजी जा रही है, लेकिन उनका पता नहीं चल पा रहा। बाबुओं का कहना है कि फाइलें तत्कालीन एडीएम ने मंगाई थी। इधर, फाइलें गायब होने के पीछे बड़े गोलमाल की भी चर्चा है। वर्ष 1974 में क्षेत्र के कई लोगों को जमीन के पट्टे आवंटित किए गए थे, वही रिकार्ड इन फाइलों में दर्ज था।