जिले के निजी स्कूलों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत गरीब बच्चों को मुफ्त दाखिला दिलाने की मुहिम को झटका लगा है। प्रवेश के लिए तीन चरण की लंबी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी जिले में 1254 सीटें रिक्त रह गई हैं। प्रशासन और शिक्षा विभाग के तमाम दावों के बावजूद कुल आवंटित सीटें भर नहीं पाई हैं।
हैरानी की बात यह है कि जैसे-जैसे आवेदन के चरण आगे बढ़े, वैसे-वैसे आवंटित सीटों की संख्या कम होती गई। प्रथम चरण में जहां मुफ्त दाखिले के लिए अभिभावकों ने उत्साह दिखाया। वहीं तीसरे चरण तक आते-आते आंकड़ा सिमट गया।
कई अभिभावक अपने घर से स्कूलों की अधिक दूरी होने के कारण बच्चों का दाखिला नहीं करा पा रहे हैं। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और ऑनलाइन प्रक्रिया की जटिलता भी मुफ्त प्रवेश में बड़ी बाधा बनी हुई है।
आरटीई से प्रवेश वाले विद्यालयों की संख्या 634
कुल सीटें 3947
कुल आवंटित 2693
आरटीई के तहत रिक्त सीटें 1254
आरटीई में चरण वार सीटें आवंटन
प्रथम चरण 1980
दूसरे चरण 417
तीसरे चरण 296
तीन चरणों में मुफ्त प्रवेश का प्रावधान था। जो आवेदन आए, उनमें से पात्रता पूरी करने वालों के प्रवेश पूरे करा दिए गए हैं।
-स्वाति भारती, बीएसए