रासाचार्य फतेह कृष्ण शर्मा की रास मंंडली के कलाकारों ने श्रीकृष्ण सुदामा प्रसंग पर रासलीला का मंचन किया। कलाकारों ने दिखाया कि भगवान श्रीकृष्ण व उनके मित्र सुदामा संदीपन गुरु के आश्रम में शिक्षा ग्रहण करते थे।
धनवान होने के बाद कभी भी मित्र को नहीं भूलना चाहिए। मित्र भगवान का दूसरा स्वरूप होता है। एक मित्र को दूसरे मित्र के साथ कभी विश्वासघात नहीं करना चाहिए, जो व्यक्ति अपने मित्र के साथ विश्वासघात करता है तो ईश्वर की ओर से उसे कभी न कभी दंड रूपी कठोर सजा देते है। यह बातें बनवारीपुर स्थित श्री बांके बिहारी महाराज के इक्कीसवें प्राकट्योत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीरामलीला महोत्सव के दौरान वृंदावन के रासाचार्य फतेह कृष्ण शर्मा ने कही।
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रासाचार्य फतेह कृष्ण शर्मा की रास मंंडली के कलाकारों ने श्रीकृष्ण सुदामा प्रसंग पर रासलीला का मंचन किया। कलाकारों ने दिखाया कि भगवान श्रीकृष्ण व उनके मित्र सुदामा संदीपन गुरु के आश्रम में शिक्षा ग्रहण करते थे। तब गुरु संदीपन ने श्रीकृष्ण व सुदामा को जंगल में लकड़ी काटने के लिए भेज दिया। इस दौरान गुरु माता द्वारा दिए गए चने को सुदामा भूख लगने पर खा गए।
जब श्रीकृष्ण को भूख लगी तो सुदामा ने चना बरसात के दौरान बिजली कड़कने के दौरान गिर जाने की बात कहकर झूठ बोल दिया। भगवान श्रीकृष्ण से झूठ बोलने की सजा उनको दरिद्र बनकर गुजारनी पड़ी। मुसीबत के समय में भी सुदामा ने नारायण का सुमिरन करना नहीं छोडा। एक दिन पत्नी सुशीला ने पति सुदामा को श्रीकृष्ण से सहायता लेने के लिए भेजा। जैसे ही सुदामा द्वारिका नगरी पहुंचे तो श्रीकृष्ण अपने राजमहल व रानियों को छोड़कर मित्र सुदामा से मिलने के लिए नंगे पैर दौडे़ चले आए। भगवान श्रीकृष्ण ने सुदामा की दीन हीन दशा देखकर उनके दु:ख हरते हुए गले लगा लिया।