जिला अस्पताल के आवास परिसर में लगा ट्रांसफाॅर्मर सोमवार की सुबह लगभग 11 बजे ओवरहीट के कारण फट गया और कॉइल में आग लग गई। धुएं के बाद ट्रांसफाॅर्मर से तेज लपटें उठने लगीं। तेल बाहर गिरने से नीचे कूड़े में भी आग लग गई। हादसे के कारण काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल रहा। दोपहर बाद तक अस्पताल की बिजली आपूर्ति प्रभावित रही।
जिला अस्पताल को निर्बाध बिजली देने के लिए ओढ़पुरा बिजलीघर से स्वतंत्र फीडर निकल रहा है। गर्मियों में लोड के कारण अकसर फॉल्ट होते रहते थे, जिससे मरीजों को समस्या झेलनी पड़ती थी। स्वतंत्र फीडर के बावजूद ओवरलोडिंग के चलते सोमवार की सुबह ट्रांसफाॅर्मर में आग लग गई।
सूचना मिलते ही जिला अस्पताल प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई। कर्मचारी दौड़कर मौके पर पहुंचे। कर्मचारियों ने जिला अस्पताल में रखे फायर एक्सिटिंग्यूशर निकाल लिए और आग को बुझाने का प्रयास किया।
तेल जमीन पर गिरने के कारण सूखी घास व कूड़े में भी आग लग गई थी। अग्निशमन विभाग का एक बड़ा फायर टेंडर व एक वाटर मिस्ट गाड़ी मौके पर पहुंची और कूड़े में लगी आग पर काबू पाया। शटडाउन लेने के बाद वाटर मिस्ट से ट्रांसफाॅर्मर को ठंडा किया।
इसलिए लग रही आग
अत्यधिक भार और भयंकर गर्मी के कारण ट्रांसफार्मर का इंसूलेटिंग ऑयल यानी कूलिंग ऑयल फेल हो जाता है। बाहर की तपिश और अंदर की गर्मी मिलकर तापमान बढ़ा देती है। कूलिंग ऑयल के काम बंद करते ही ट्रांसफाॅर्मर की कॉइल गर्म होकर आपस में चिपककर शॉर्ट सर्किट कर देती हैं, जिससे पहले धुआं निकलता है और फिर तेल के कारण आग लग जाती है।
बिजली गुल होने से लोगों ने झेली परेशानी
आग लगते ही ओढ़पुरा फीडर से शट डाउन लिया गया। सुबह 11 बजे के बाद से जिला अस्पताल में आपूर्ति प्रभावित रही। कुछ देर के लिए तो अंधेरा भी छा गया। जेनरेटर चलाया गया, जो बार-बार लोड के कारण बैठ रहा था। इस पर सीटी स्कैन व एक्स-रे मशीन का काम रुकवाना पड़ा। सभी ओपीडी कक्ष व कार्यालयों के एसी बंद कराए गए, जिसके बाद मशीनें शुरू कराई गईं। दोपहर दो बजे तक बिजली नहीं आ सकी थी, जिससे मरीजों को निराश लौटना पड़ा। दूसरा ट्रांसफार्मर लगवाने के बाद शाम को जिला अस्पताल की आपूर्ति सुचारू हो सकी।
आग की सूचना मिलते ही जिला अस्पताल में रखे फायर एक्सटिंग्यूशर से आग पर काबू पा लिया गया था। बिजली न आने के कारण कुछ देर मरीजों को परेशानी हुई, लेकिन जेनरेटर से सभी व्यवस्थाएं सुचारू करा दी गई थीं।
-डाॅ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस
ट्रांसफार्मर आवास व अस्पताल के भवन से अलग था, इसलिए किसी की जान को खतरा नहीं था। दमकल ने पहुंचते ही स्थिति को नियंत्रण में ले लिया था।
-दीपक कुमार, एफएसओ