लखनऊ के इको गार्डन में मंगलवार को प्रस्तावित प्रदेश स्तरीय सम्मेलन में शामिल होने जा रहे जिले के ग्राम प्रधानों और संगठन पदाधिकारियों पर पुलिस प्रशासन ने शिकंजा कस दिया। सोमवार शाम से ही पुलिस ने कई प्रधानों के घरों पर नजर रखनी शुरू कर दी और मंगलवार को जिले के 100 से अधिक ग्राम प्रधानों को नजरबंद कर दिया गया।
अखिल भारतीय ग्राम प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष राजकुमार प्रधान ने बताया कि प्रदेशभर के ग्राम प्रधानों का कार्यकाल आगामी 26 मई को समाप्त हो रहा है। मौजूदा परिस्थितियों में समय पर पंचायत चुनाव कराना संभव नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में यदि निर्वाचित पंचायतों के स्थान पर प्रशासकों की नियुक्ति की जाती है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर झटका होगा।
सोमवार शाम से ही पुलिस ने कई ग्राम प्रधानों और संगठन पदाधिकारियों के आवासों पर निगरानी शुरू कर दी। मंगलवार सुबह कई प्रधानों को घरों से बाहर निकलने से रोक दिया गया। संगठन के जिलाध्यक्ष राजकुमार प्रधान, विधानसभा अध्यक्ष महाराज सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष श्यामवीर सिंह, प्रधान रनवीर सिंह समेत जिलेभर के अनेक प्रधानों को नजरबंद कर दिया गया। इनके घर पर पुलिस बल की तैनाती रही।
राजकुमार प्रधान ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया है। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधान अपनी लोकतांत्रिक मांगों को लेकर शांतिपूर्ण सम्मेलन में शामिल होने जा रहे थे, लेकिन उन्हें रोकने का प्रयास किया गया। इसके बावजूद जिले के करीब 200 ग्राम प्रधान अलग-अलग माध्यमों से लखनऊ के लिए रवाना हो गए।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो प्रदेशव्यापी आंदोलन और तेज किया जाएगा। हाथरस में ग्राम प्रधान लाड़पुर कृष्ण गोपाल सहित अन्य प्रधानों को नजर बंद किया है। इधर, सासनी क्षेत्र में थानाध्यक्ष विपिन चौधरी के नेतृत्व में पुलिस बल ने विकास खंड के प्रधान संघ के सदस्य विजय कुशवाहा सासनी देहात, सोमेश सोलंकी सुसायत खुर्द, संतोष शर्मा द्वारिकापुर, अर्जुन सिंह लुटसान, हपेंद्र सिंह अजरोई, अमित कुमार सोलंकी नगला केहरिया, संतोष कुमार खेड़ा फीरोजपुर, देवेंद्र सिंह फतेला नगला के आवासों को घेर लिया।