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अंबे तू है, जगदंबे काली: आरती को गाया कई गायकों ने दिए, आप नहीं जानते होंगे इसे लिखा किसने, यह थे वह शख्स

Wed, 04 Jun 2025 03:55 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

अंबे तू है जगदंबे काली... आरती नवदुर्गा, शुक्रवार के साथ बहुत बार सुनी और गाई होगी। इसे कई गायकों ने गाया, पर इसको लिखा किसने था, यह भी जानना जरूरी है। आइए इस आरती के रचियता के बारे में जानते हैं...
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मां अंबे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मां दुर्गा की विश्व प्रसिद्ध आरती अंबे तू है जगदंबे काली... की रचना हाथरस में हुई थी। हाथरस शहर के स्व. राजेंद्र कुमार शर्मा उर्फ रज्जो गुरु ने इसकी रचना की थी। इसको मशहूर पार्श्व गायिका अनुराधा पौड़वाल ने गाया जरूर है, लेकिन इसके वास्तविक रचनाकार रज्जो गुरु थे, जिन्हें आज तक इसका कोई श्रेय नहीं मिला। मंगलवार को शहर के साहित्यकारों ने नवागत एसडीएम सदर राजबहादुर सिंह से मिल कर इसका समाधान तलाशने की मांग उठाई। 

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आशु कवि अनिल बौहरे के नेतृत्व में एसडीएम सदर कार्यालय पहुंचे साहित्यकार डाॅ.उपेंद्र झा, सोनाली और रूपम कुशवाह ने कहा कि रचनाकार को इसका श्रेय जरूर मिलना चाहिए। जिससे दुनिया को पता चल सके कि इस रचना को किसने लिखा था। कवियों ने एसडीएम से साहित्यकारों की अन्य समस्याओं के निदान का आग्रह किया। अनिल बौहरे ने कहा कि क्षेत्र के साहित्यकारों की डायरेक्टरी बनाई जाए। जिससे कोई भी व्यक्ति कहीं से भी उनके बारे में जानकारी जुटा सके। उनसे संपर्क कर सके।

साहित्यकारों और कवियों को आर्थिक सहयोग प्रदान किया जाए, ताकि उनका जीवनयापन सरल हो सके। राजा दयाराम एवं काका हाथरसी के योगदान को भी महत्व दिया जाए। इस अवसर पर सुशीलचंद अग्निहोत्री एडवोकेट तथा डाॅ. सत्यप्रकाश डेंटिस्ट ने भी अपने सुझाव रखे।

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एसडीएम सदर राज बहादुर सिंह ने कहा है कि अगर साहित्यकारों का दावा उचित है तो इसको देश के दो प्रमुख अखबारों में प्रकाशित कराया जाए। इस दावे पर जनमानस से आपत्ति मांगी जाए। तयशुदा वक्त में अगर कोई आपत्ति नहीं आती है तो प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इन साहित्यकारों की ओर से सिविल न्यायालय में एक वाद दाखिल किया जाएगा। इसके बाद आरती का कॉपीराइट उनके नाम पर हो सकता है। 

सीकना पान लगी में रहते थे राजेंद्र 
मां दुर्गा की आरती लिखने वाले स्व.राजेंद्र कुमार शर्मा उर्फ रज्जो गुरु दशकों पहले तक शहर की सीकना पान गली में रहते थे। उनकी इस रचना के लगभग 50 वर्ष हो चुके हैं। अब उनका परिवार कहां है, साहित्यकारों को इसकी जानकारी नहीं है। साहित्यकार केवल यही कहते हैं कि उनके परिजनों की तलाश तभी हो सकती है, जब उनकी रचना के बारे में लोगों को पता चलेगा। शायद इसी माध्यम से उनके परिवार वालों से संपर्क हो सकेगा। 
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अम्बे तू है जगदम्बे काली... 

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।
तेरे भक्त जनो पर माता भीर पड़ी है भारी।
दानव दल पर टूट पड़ो मां करके सिंह सवारी॥
सौ-सौ सिहों से बलशाली, है अष्ट भुजाओं वाली,
दुष्टों को तू ही ललकारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

माँ-बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता।
पूत-कपूत सुने है पर ना माता सुनी कुमाता॥
सब पे करूणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली,
दुखियों के दुखड़े निवारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना।
हम तो मांगें तेरे चरणों में छोटा सा कोना॥
सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली,
सतियों के सत को संवारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली।
वरद हस्त सर पर रख दो माँ संकट हरने वाली॥
माँ भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओं वाली,
भक्तों के कारज तू ही सारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥
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