एसडीएम सदर राज बहादुर सिंह ने कहा है कि अगर साहित्यकारों का दावा उचित है तो इसको देश के दो प्रमुख अखबारों में प्रकाशित कराया जाए। इस दावे पर जनमानस से आपत्ति मांगी जाए। तयशुदा वक्त में अगर कोई आपत्ति नहीं आती है तो प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इन साहित्यकारों की ओर से सिविल न्यायालय में एक वाद दाखिल किया जाएगा। इसके बाद आरती का कॉपीराइट उनके नाम पर हो सकता है।
सीकना पान लगी में रहते थे राजेंद्र
मां दुर्गा की आरती लिखने वाले स्व.राजेंद्र कुमार शर्मा उर्फ रज्जो गुरु दशकों पहले तक शहर की सीकना पान गली में रहते थे। उनकी इस रचना के लगभग 50 वर्ष हो चुके हैं। अब उनका परिवार कहां है, साहित्यकारों को इसकी जानकारी नहीं है। साहित्यकार केवल यही कहते हैं कि उनके परिजनों की तलाश तभी हो सकती है, जब उनकी रचना के बारे में लोगों को पता चलेगा। शायद इसी माध्यम से उनके परिवार वालों से संपर्क हो सकेगा।