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महाराष्ट्र सड़क हादसा: गांव पहुंचा दूसरे कांवड़िया का शव, परिवार में मचा कोहराम, किया अंतिम संस्कार

Mon, 05 Jan 2026 10:10 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

कांवड़ यात्रा में शामिल लोगों को ट्रक ने रौंद दिया था। हादसे में पीयूष दीक्षित की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। शव के आते ही परिवार में कोहराम मच गया। मां व बुआ का रो-रोकर बुरा हाल था।
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मृतक पीयूष दीक्षित के शव आने पर गुमसुम बैठे बाबा - फोटो : संवाद
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विस्तार
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महाराष्ट्र के वर्धा में हुए सड़क हादसे में 3 जनवरी रात दूसरे कांवडि़या पीयूष दीक्षित की मौत हो गई थी। 5 जनवरी की सुबह हाथरस जंक्शन के गांव बबूल में पीयूष का शव पहुंचा। शव आते ही परिवार में कोहराम मच गया। 

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हरिद्वार से रामेश्वरम जा रही कांवड़ यात्रा में शामिल लोगों को ट्रक ने रौंद दिया था। हादसे में जगदीश निवासी समामई, सासनी की मौके पर ही मौत हो गई थी। जबकि इसी गांव के भोला पंडित के ममेरे भाई पीयूष दीक्षित(16) की 3 जनवरी रात उपचार के दौरान मौत हो गई थी। 
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पीयूष के दो भाई व एक बहन के बीच दूसरे नंबर का था। वह सासनी में केएल जैन इंटर कॉलेज में कक्षा नौ का छात्र था। पोस्टमार्टम के बाद 4 जनवरी दोपहर को शव हाथरस के लिए भेजा गया। गांव बबूल में 5 जनवरी की सुबह से ही भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। सुबह साढ़े नौ बजे शव के आते ही परिवार में कोहराम मच गया। मां व बुआ का रो-रोकर बुरा हाल था। पुलिस सुरक्षा में अर्थी उठी। अंत्येष्टि के बाद तक एसडीएम, सीओ व कई थानों का फोर्स गांव में मौजूद रहा। 

पुलिस सुरक्षा के बीच मृतक का अंतिम संस्कार कराया गया। भोला को लेकर परिजन नाराज थे, जिन्हें समझाकर शांत किया गया। इस दुख की घड़ी में पुलिस प्रशासन परिवार के साथ है। गांव में शांति बनी हुई है। -जेएन अस्थाना, सीओ सिकंदराराऊ।

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पिता बोले- बेटा पढ़ाई में होशियार था

पिता योगेश ने बताया कि उनका बेटा पढ़ाई में काफी होशियार था। छोटा होने के कारण सभी उसे प्यार करते थे। दो जनवरी को हादसे की जानकारी होते ही वे वर्धा के लिए रवाना हो गए थे। शनिवार को पहुंचे तो उसका उपचार चल रहा था। कुछ देर बाद चिकित्सकों ने बताया कि वह अब नहीं रहा। 
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भोला को देख आपा खो बैठे बाबा 
छोटे नाती के जाने से आहत बाबा हरी निवास गांव में भोला को देखते ही आपा खो बैठे। भोला एंबुलेंस के पीछे-पीछे विहिप व बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचा था। सोशल मीडिया पर रील डालने व हुजूम एकत्रित करने से बाबा बिफर गए और उसे वहां से जाने के लिए कह दिया। इधर, परिजनों की नाराजगी देख कार्यकर्ता भी वहां से चले गए। भोला ही कांवड़ यात्रा लेकर गया था, जिस कारण वे उसे ही घटना के लिए जिम्मेदार मान रहे थे। सीओ सिकंदराराऊ ने बताया कि सुरक्षा कारणों से फिर भोला को गाड़ी में बैठा दिया। बाद में पुलिस सुरक्षा में ही आखिर में उसे अंत्येष्टि स्थल तक ले जाया गया। 
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