पिता योगेश ने बताया कि उनका बेटा पढ़ाई में काफी होशियार था। छोटा होने के कारण सभी उसे प्यार करते थे। दो जनवरी को हादसे की जानकारी होते ही वे वर्धा के लिए रवाना हो गए थे। शनिवार को पहुंचे तो उसका उपचार चल रहा था। कुछ देर बाद चिकित्सकों ने बताया कि वह अब नहीं रहा।
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भोला को देख आपा खो बैठे बाबा
छोटे नाती के जाने से आहत बाबा हरी निवास गांव में भोला को देखते ही आपा खो बैठे। भोला एंबुलेंस के पीछे-पीछे विहिप व बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचा था। सोशल मीडिया पर रील डालने व हुजूम एकत्रित करने से बाबा बिफर गए और उसे वहां से जाने के लिए कह दिया। इधर, परिजनों की नाराजगी देख कार्यकर्ता भी वहां से चले गए। भोला ही कांवड़ यात्रा लेकर गया था, जिस कारण वे उसे ही घटना के लिए जिम्मेदार मान रहे थे। सीओ सिकंदराराऊ ने बताया कि सुरक्षा कारणों से फिर भोला को गाड़ी में बैठा दिया। बाद में पुलिस सुरक्षा में ही आखिर में उसे अंत्येष्टि स्थल तक ले जाया गया।