चार मार्च को बीडीसी सदस्य अपनी पत्नी के साथ जिला चिकित्सालय हाथरस में अपनी साढ़े तीन माह की मासूम बच्ची को दवा दिलवाने के लिए गए थे। राज्यपाल आगमन के दौरान कोतवाली प्रभारी, उपनिरीक्षक के साथ पुलिस कर्मियों ने बिना कारण बताए ही घसीटकर बाहर निकाल दिया।
हसायन विकास खंड क्षेत्र के गांव बसई बावस के नवनिर्वाचित दलित दिव्यांग बीडीसी सदस्य ने राज्यपाल के आगमन के दौरान पुलिसकर्मियों पर अस्पताल से घसीटते हुए बाहर निकालने का आरोप लगाया है।
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पीड़ित ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, सीएम योगी आदित्यनाथ, पुलिस महानिदेशक, अनुसूचित जाति जनजाति आयोग के अध्यक्ष, महिला आयोग अध्यक्ष, मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष, मंडलायुक्त अलीगढ़, पुलिस उप महानिरीक्षक अलीगढ़ के अलावा डीएम एवं एसपी से इसकी शिकायत की है। हालांकि, पुलिस ने इसे बेबुनियाद बताया है।
बीडीसी सदस्य संजय जाटव पुत्र दुशासन जाटव ने बताया कि चार मार्च को वह अपनी पत्नी के साथ जिला चिकित्सालय हाथरस में अपनी साढ़े तीन माह की मासूम बच्ची को दवा दिलवाने के लिए गए थे। दौरान राज्यपाल के आगमन के दौरान कोतवाली प्रभारी, उपनिरीक्षक पुलिस कर्मियों के साथ 20-25 पुलिस कर्मियों ने बिना कारण बताए ही घसीटकर बाहर निकाल दिया। पुलिसकर्मियों ने अभद्रता करते हुए जेल भेजने की भी धमकी दी।
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संजय जाटव का कहना है कि घटना का फोटो मेरे पास है। एसएनसीयू महिला हॉस्पिटल में लगे सीसीटीवी कैमरे में भी दर्ज हैं। अगर पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो पत्नी व बेटी के साथ लखनऊ राज्यपाल, मुख्यमंत्री के आवास या कार्यालय पर धरना प्रदर्शन कर भूख हड़ताल करने के लिए बाध्य रहूंगा।
इस तरह के आरोप निराधार हैं। मेरे द्वारा किसी से मारपीट या अभद्रता नहीं की गई। जब राज्यपाल का बागला जिला अस्पताल में कार्यक्रम था तो वहां मेरे आला अधिकारी भी मौजूद थे। उनकी मौजूदगी में आखिर यह कैसे संभव है। इसलिए आरोप बेबुनियाद हैं। - गौरव सक्सैना, कोतवाली निरीक्षक, हाथरस गेट