हाथरस। सरकारें भले ही महिलाओं की सुरक्षा के लिए कितने ही कानून क्यों न बना लें लेकिन जागरूकता और योजनाओं के प्रचार-प्रसार के अभाव में यह सभी कानून दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। कॉलेज हो या स्कूल, घर हो या बाजार, महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। महिलाएं उपेक्षा और शोषण का शिकार हो रही हैं। आज पूरा देश अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने को प्रतिबद्ध है वहीं कुछ महिलाओं को इसके मायने तक नहीं पता हैं।
महिला हैं प्रधान, प्रधानी करते हैं पति
जिले की कई ग्राम पंचायतों में महिला प्रधान हैं लेकिन जागरूकता और योजनाओं के प्रचार-प्रसार के अभाव में वह अपने अधिकारों से अनजान हैं। ग्राम पंचायतों में घूंघट की आड़ में प्रधानी करने वाली महिलाएं सिर्फ नाम की प्रधान हैं उनकी प्रधानी या तो उनके पति चला रहे हैं या फिर बेटे। अगर इन महिलाओं को उनके अधिकारों की सही जानकारी हो तो परिस्थितियां बदल सकती हैं।
स्कूल-कॉलेज के बाहर सुरक्षा बढ़े
स्कूल-कॉलेजों के बाहर अराजक तत्व आए दिन छेड़छाड़ की वारदातों को अंजाम देते रहते हैं। पुलिस प्रशासन की अनदेखी के कारण इस तरह की घटनाओं में इजाफा हो रहा है। इस तरह की घटनाओं पर भी अंकुश लगाया जाए तभी महिलाओं में असुरक्षा की भावना को खत्म किया जा सकता है।
बरसों से बूट पॉलिस कर रही है चंदा
चंदा एक ऐसी महिला का नाम है जो आज भी संघर्ष करते हुए जिंदगी को जिंदादिली से जी रही है। प्रशासन ने आज तक इस महिला की न तो कोई खैर खबर ली और न ही कोई सरकारी मदद दी। आगरा रोड पर बूट पॉलिस का काम करने वाली चंदा से जब पूछा गया कि आज महिला दिवस है क्या आपको पता है तो उसने इस दिवस के बारे में अनभिज्ञता जताई। उसने कहा कि कई बार उसके फोटो खींचे गए, कई बार सामाजिक संगठनों के लोग आए लेकिन आज तक उसे कोई सरकारी मदद नहीं मिली। चंदा ने बताया कि वह बेहद गरीब है। उसके पति को सांस की बीमारी है। उसके तीन लड़के हैं। एक लड़के की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। दूसरे लड़के को वह जैसे-तैसे पढ़ा रही है।