हाथरस। ईस्टर्न रेलवे डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसान एक बार फिर आंदोलन के लिए कमर कस रहे हैं। किसानों का यह आंदोलन अधिग्रहीत भूमि का एनसीआर की दरों पर मुआवजा देने समेत कई प्रमुख मांगों को लेकर होगा। किसानों ने ऐलान कर दिया है कि अगर मांगें पूरी किए बिना उनकी जमीन ली गई तो वह संघर्ष के लिए मजबूर होंगे।
सासनी विकास खंड कार्यालय के परिसर में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और किसान सभा के बैनर तले बड़ी संख्या में अधिग्रहण प्रभावित किसान जुटे। किसानों ने एक स्वर से परियोजना के लिए अधिग्रहीत की जा रही जमीन का एनसीआर की दर पर मुआवजा दिए जाने, प्रभावित परिवार के एक सदस्य को योग्यतानुसार वेतन और नौकरी देने, फलदान वृक्षों का उद्यान विभाग द्वारा निर्धारित दर पर मुआवजा देने, लघु और सीमांत किसानों को नियमानुसार अतिरिक्त लाभ देने, बैनामा में हुए स्टांप और रसीद खर्च तत्काल वापस लेने और आवासीय जमीन के अधिग्रहण का बाजार दरों पर मुआवजा देने की मांग उठाई। यह सभी मांगें रेलवे और प्रदेश सरकार के सामने रखी जाएंगी।
तय किया गया कि इस संघर्ष की बागडोर संभालने के लिए भाकपा और किसान सभा का संगठन खड़ा किया जाएगा। 11 सदस्यीय संचालन समिति का गठन कर दिया गया है, जिसमें डॉ. रामप्रकाश, बाबू सिंह थंबार, भूदेव प्रसाद, पुष्पराज सिंह, ओमप्रकाश, मुरली सिंह, नवल किशोर शर्मा, रवेंद्र सिंह, सत्यपाल सिंह, डॉ. चरण सिंह बघेल और होशियार सिंह को शामिल किया गया है। समिति प्रभावित किसानों को लामबंद करने के लिए 15 मई को सुबह 10 बजे से गांव सिताहरी में पंचायत करेगी। किसानों से इसमें सहभागिता करने की अपील की गई है। भाकपा के प्रदेश सचिव डॉ. गिरीश ने कहा कि भाकपा इस संघर्ष को पूरी ताकत से समर्थन देगी। अध्यक्षता मुरलीधर नगला सिंह ने की।