हाथरस से हस्तशिल्प का सामान रेवाड़ी, उत्तर प्रदेश, गुजरात आदि कई प्रांतों में जाता है। शहर के अटल टाल रोड, बंदरवन आदि इलाकों में छोटी-बड़ी करीब 100 इकाइयां हैं। इनसे करीब एक हजार लोगों को रोजगार मिलता है। अब हाथरस के हस्तशिल्प की झलक इंदौर के खेड़ापति हनुमान मंदिर में दिखाई देगी।
हाथरस के हस्तशिल्प का जलवा अब इंदौर के खेड़ापति हनुमान मंदिर में दिखेगा। हाथरस में इंदौर के एक श्रद्धालु ने यह गदा तैयार कराई है। आठ क्विंटल की 22 फुट लंबी व छह फुट चौड़ी गदा का निर्माण हाथरस के कारीगरों ने किया है। इस गदा को बनाने पर करीब पांच लाख रुपये लागत आई है। 15 कारीगरों ने दो माह में इसको तैयार किया है।
विज्ञापन
उल्लेखनीय है कि हाथरस से हस्तशिल्प का सामान रेवाड़ी, उत्तर प्रदेश, गुजरात आदि कई प्रांतों में जाता है। शहर के अटल टाल रोड, बंदरवन आदि इलाकों में छोटी-बड़ी करीब 100 इकाइयां हैं। इनसे करीब एक हजार लोगों को रोजगार मिलता है। अब हाथरस के हस्तशिल्प की झलक इंदौर के खेड़ापति हनुमान मंदिर में दिखाई देगी।
इस गदा में फूलों की नक्काशी और जय श्रीराम आदि लिखने में दो माह का समय लगा। इस गदा में पीतल के अलावा अष्टधातु का प्रयोग किया गया है। गदा बनाने वाले प्रवीण का कहना है कि इंदौर में हनुमान जी काफी प्राचीन मंदिर है। इस गदा को उनके पास विराजमान किया जाएगा। यह वहांं के एक भक्त द्वारा बनवाई गई है।