अतरौली। बीती 20 नवंबर को हुई मारपीट में घायल युवक की मौत के बाद शव लेकर आए परिजनों ने अतरौली चौराहा पर जाम लगा दिया। परिजनों और ग्रामीणों ने आरोपियों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग की। पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर रिपोर्ट दर्ज करने की बात कही। इस पर परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो गए। लगभग दो घंटे के हंगामे के बाद सीओ के समझाने पर परिजन शांत हुए।
अतरौली थाना क्षेत्र कुरौंध निवासी संजीव पांडेय (27) लखनऊ में प्राइवेट नौकरी करता था। बीती 20 नवंबर को अपने भाई राजीव पांडेय के साथ उनके पुत्र आरव पांडेय का मुंडन कराने के लिए सीतापुर जनपद के बिसवां गया था। परिजनों के मुताबिक वहां से वापस आते समय कौड़िया गांव के पास नौ लोगों ने घेरकर संजीव और राजीव को पीट दिया था। उस वक्त घटना की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कोई तहरीर नहीं दी गई थी, लेकिन संजीव की हालत बिगड़ने पर परिजन उसे लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल ले गए।
वहां शुक्रवार रात संजीव की मौत हो गई। इसके बाद पुलिस को मृतक के चाचा श्रवण पांडेय ने तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर मामला दर्ज किए जाने की बात कही। शनिवार की शाम शव वाहन को परिजनों और ग्रामीणों ने लखनऊ से लाकर अतरौली चौराहा पर खड़ा कर दिया।
यहां बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए और जमकर आक्रोश जताया। जानकारी पर सीओ संडीला सतेंद्र कुमार सिंह, बेनीगंज कोतवाल अशोक कुमार सिंह, संडीला कोतवाल आनंद नारायण त्रिपाठी और अतरौली थानाध्यक्ष नीरज कुमार ने लोगों को समझाने की कोशिश की। यह लोग रिपोर्ट दर्ज कराने पर अड़े थे। सीओ सतेंद्र सिंह ने तहरीर देने को कहा और रिपोर्ट दर्ज किए जाने को लेकर आश्वस्त किया। इसके बाद मामला शांत हुआ।
क्षेत्रीय विधायक और पुलिस के खिलाफ मृतक के परिजनों ने जमकर नारेबाजी की। इन लोगों का आरोप था कि विधायक के दबाव में पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है, जबकि पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करने का भरोसा दिला रही थी। मृतक के परिजनों का आरोप था कि आरोपी विधायक से जुड़े हुए हैं, इसलिए पुलिस लापरवाही कर रही है।
मृतक की बहन को आरोपियों में से एक शख्स दो बार बहलाकर अपने साथ ले जा चुका है। इसी को लेकर दोनों पक्षों के बीच पिछले चार साल से रंजिश चल रही है।
संजीव पांडेय की शादी परिजनों ने तय कर दी थी। शुक्रवार को संजीव के परिजनों को गोद भराई के लिए जाना था, लेकिन संजीव की हालत गंभीर होने पर परिजन अस्पताल में ही बने रहे। 28 नवंबर को संजीव की वरीक्षा होनी थी, लेकिन उससे पहले ही शुक्रवार को उसकी मौत हो गई।