कछौना। कछौना की श्री सोमेश्वर महादेव सेवादार समिति के बैनर तले चल रहे गणेश उत्सव में सोमवार रात कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। हास्य, शृंगार और वीर रस के कवियों ने काव्य पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्नाव से आए स्वयं श्रीवास्तव के गीतों पर श्रोता झूम उठे।
कवि सम्मेलन की शुरूआत प्रीती पांडेय ने सरस्वती वंदना से की। इसके बाद आदेश तिवारी ने पढ़ा... सिर्फ खंद को उठाना नहीं चाहता, मैं किसी को झुकाना नहीं चाहता। रोशनी सिर्फ मेरे तलक ही रहे, इस तरह जगमगाना नहीं चाहता। प्रतापगढ़ से आए ओज के कवि लवलेश यदुवंशी ने पढ़ा... भले ही मौत मेरी आ भी जाए युद्ध में लेकिन, मुझे ये गर्व है कि मरता हूं मैं भारत की माटी में। फर्रुखाबाद से गीतकार उत्कर्ष अग्निहोत्री ने पढ़ा.... रिश्तों में पड़ती नहीं यूं ही व्यर्थ दरार, कुछ तुम भी जिम्मेदार हो कुछ हम भी जिम्मेदार।
हास्य कवि लटूरी लट्ठ ने श्रोताओं को अपनी रचनाएं सुनाकर लोटपोट कर दिया। उन्होंने पढ़ा... वो हिंदी के बल सारी दुनिया डोल लेता है, अंग्रेजी तो पउआ पीकर भी बोल लेता है। संचालन कर रहे कवि अजीत शुक्ल ने पढ़ा... शहर की हवा क्या लगी अब गांव नहीं छूटे, दौलत आ गई तो गरीबों के ठांव नहीं छूटे। इसके बाद उन्नाव से आए स्वयं श्रीवास्तव ने गीत पढ़ने शुरू किए तो श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। उन्होंने पढ़ा... मुश्किल थी संभलना ही पड़ा घर के वास्ते, फिर घर से निकलना ही पड़ा घर के वास्ते। मजबूरियों का नाम हमने शौक रख दिया, फिर शौक बदलना ही पड़ा घर के वास्ते।
प्रयागराज से आए हास्य कवि राधेश्याम भारती ने पढ़ा... सिर बोझ गृहस्थी का लिए हांफता रहा, बाधाओं को हिम्मत से सदा लांघता रहा। घर में महाभारत मेरे बेटों ने रच दिया, मैं जिंदगी भर राम कथा बांचता रहा। कवि सम्मेलन में भाजपा जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन, पूर्व जिलाध्यक्ष राजीव रंजन मिश्र, भाजपा के जिला उपाध्यक्ष कर्मवीर सिंह चौहान, नगर पालिका अध्यक्ष सुख सागर मिश्र मधुर मौजूद रहे। कछौना नगर पंचायत के अध्यक्ष पंकज शुक्ला और अधिशासी अधिकारी देवांशी दीक्षित ने अतिथियों का आभार जताया।