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केंद्रीय उपभोक्ता भंडार के अध्यक्ष अरुण मौर्य सपा में शामिल

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लखनऊ में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को स्मृतिचिंह देते डॉ. अरुण मौर्य। संवाद - फोटो : HARDOI
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हरदोई। केंद्रीय उपभोक्ता भंडार के अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार मौर्य शुक्रवार को समर्थकों के साथ लखनऊ में समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। डॉ. मौर्य का जनपद में शाहाबाद और सवायजपुर विधानसभा क्षेत्र में पिछड़ा वर्ग में काफी प्रभाव माना जाता है। उन्हें प्रदेश सरकार के एक कैबिनेट मंत्री का भी बेहद करीबी माना जाता है। डॉ. मौर्य भाजपा पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के अध्यक्ष रह चुके हैं और एक विवाद में नाम आने पर उन्हें पार्टी से निलंबित किया गया था।
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शुक्रवार सुबह केंद्रीय उपभोक्ता भंडार के अध्यक्ष डॉ. अरुण मौर्य को लखनऊ में समाजवादी पार्टी के कार्यालय में देखा गया। दोपहर होते-होते वह औपचारिक रूप से पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समक्ष सपा में शामिल हो गए। खास बात यह है कि वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले बसपा के एक कद्दावर नेता के भाजपा में शामिल होने के बाद डॉ. अरुण मौर्य भी भाजपा में शामिल हो गए थे। भाजपा ने उन्हें केंद्रीय उपभोक्ता भंडार का अध्यक्ष बनाया था। साथ ही साथ पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ का जिलाध्यक्ष भी बनाया था। डॉ. अरुण मौर्य के सपा में शामिल होने से सवायजपुर और शाहाबाद विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक गणित बदल सकती है।
डॉ. अरुण मौर्य 2012 के विधानसभा चुनाव में पीस पार्टी के टिकट पर सवायजपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े थे और लगभग 19 हजार वोट उन्हें मिले थे। उनकी पत्नी विनीता मौर्य और उनके छोटे भाई की पत्नी विनीता जिला पंचायत सदस्य रह चुकी हैं। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक डॉ. अरुण को सपा में शामिल कराने में शाहाबाद के पूर्व विधायक आसिफ खां बब्बू, एमएलसी डॉ. राजपाल कश्यप और जिलाध्यक्ष जितेंद्र वर्मा जीतू की अहम भूमिका रही।
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मूर्ति तोड़ने में किए गए थे भाजपा से निलंबित
भाजपा के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के अध्यक्ष रहने के दौरान शहर के मोहल्ला सुभाषनगर में एक शिव मंदिर में विवाद हो गया था। एक वर्ग विशेष के लोगों ने यहां शिवलिंग व अन्य मूर्तियां क्षतिग्रस्त कर दी थीं। इसका वीडियो और फोटो भी वायरल हुई थीं। तब पूरे मामले में डॉ. अरुण मौर्य का नाम सामने आया था। जिलाध्यक्ष सौरभ मिश्रा ने बताया कि उक्त प्रकरण में पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया था और तब से डॉ. मौर्य भाजपा से निलंबित ही थे।
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