हरदोई। कोरोना संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने भले ही तैयारियां की हैं, लेकिन जिले में सिर्फ खानापूर्ति हुई है।
कोराेना की आहट के बीच मलेरिया और टाइफाइड के मरीज भी बढ़े हैं। इसके बाद भी एहतियात के तौर पर अलग से न तो फ्लू ओपीडी बनी है और न ही जांच की अलग से कोई व्यवस्था है। मरीजों के लिए सिर्फ बेड आरक्षित कर दिए गए हैं। वहां भी इसके अतिरिक्त अन्य कोई व्यवस्था नहीं है।
बीते सप्ताह कोरोना के केसों में अचानक से उछाला आया और इसके बाद पूरे देश में दहशत मच गई। आनन फानन स्वास्थ्य परामर्श जारी कर दिया गया। जिले में भी आए निर्देशों के बाद कोरोना को लेकर तैयारियां की गईं। समीक्षा बैठक कर स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देशित कर दिया गया और मरीजों के लिए बेड आरक्षित कर दिए गए। कोरोना की तैयारियों काे यहीं विराम दे दिया गया।
जिले में वैसे तो कोरोना को लेकर कोई संक्रमण नहीं है, लेकिन इन दिनों मलेरिया और टाइफाइड का जोर अचानक से बढ़ा है। सर्दी-बुखार के 250 से 300 मरीज परामर्श लेने पहुंच रहे हैं। इनमें से रोजाना औसतन 10 से 12 मरीजों में मलेरिया निकल रहा है। वहीं तीन से पांच लोग टाइफाइड के शिकार भी हो रहे हैं। बीमारी पांव पसार रही है, लेकिन ओपीडी में न तो अलग से कोई फ्लू ओपीडी बनी है और न ही ऐसे मरीजों के लिए जांच की अलग व्यवस्था है।
खुद उपचार को तरस रहा विभाग
हरदोई। स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालय में भले ही मरीजों को हर प्रकार की सुविधाएं देने के दांवे किए जाते हैं पर हकीकत तो यह है कि विभाग की व्यवस्था खुद ही उपचार को तरस रही है। ऑक्सीजन प्लांट लंबे समय से काम नहीं कर रहे हैं और सिलिंडरों पर दम भरा जा रहा है। कई विभागों में विशेषज्ञ चिकित्सकों का अभाव है। जहां तीन से चार चिकित्सकाें की जरूरत है, वहां एक से काम चलाया जा रहा है। ओपीडी प्रशिक्षु छात्रों के भराेसे चल रही है।
वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में इससे भी बुरा हाल है। सीएचसी व पीएचसी आधुनिक सुविधाओं से दूर है। लोगों को इलाज या जांच के लिए शहर भागना पड़ रहा है और यहां भी सुविधाएं न मिलने पर निजी अस्पतालों में जेब ढीली करनी पड़ती है। मेडिकल कॉलेज की तरफ से हर तरीके से तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं। प्लांट को चालू कराने के लिए अभियंता जांच करके जा चुके हैं। दवाओं की पर्याप्त व्यवस्था है। जांचों का दायरा भी बढ़ाया जा रहा है। जहां बेड डाले गए हैं वहां पर भी सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी। -डॉ. जेविन बिष्णु, गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
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स्वास्थ्य टीमों ने पिहानी में डाला डेरा
पिहानी। उल्टी दस्त से तीन दिन में हुई छह मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग की चार टीमों ने पिहानी के छिपीटोला, मीरसराय, कोटकलां और खुरमुली मोहल्लों में डेरा डाल दिया है। इस दौरान जांच में उल्टी दस्त का कोई नया मरीज नहीं मिला। एक सैकड़ा सामान्य मरीजों को दवा और सलाह दी गई। सीएचसी अधीक्षक डॉ. जितेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि पानी व मल के नमूनों की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। प्रभावित इलाकों में पानी की टंकी के पाइप ज्वाइंट करने के दौरान लीकेज से गंदा पानी जाने व इससे आम लोगों के इस्तेमाल करने से उल्टी दस्त फैलने का अनुमान है। कई जगह पर पूर्व में हुए लीकेज के बारे में जानकारी की गई है, जिनके बारे में ईओ ने बताया है कि वह ठीक करवाए जा चुके हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि साफ पानी ही इस्तेमाल करें। बासी भोजन और स्वच्छ फल ही खाएं।