कोथावां के कल्याणनमल के निकट बाघ की तलाश में कांबिंग करते कछौना रेंजर रामचंद्र व अन्य। संवाद
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कछौना (हरदोई)। सीतापुर से जनपदीय सीमा में घुसे बाघ को खोजने के लिए वन विभाग की टीम शुक्रवार को दूसरे दिन भी कांबिंग करती रही। कोथावां ब्लाक के कल्याणनमल गांव समेत कई गांवों में कांबिंग की गई। इस दौरान कछौना के रामपुर गांव से सात किमी दूर गोमती नदी के किनारे सैफपुरखेड़ में बाघ के पंजे के निशान देखने को मिले। कुछ दूरी पर फिर पंजे के निशान गायब हो गए। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शनिवार को भी कांबिंग जारी रहेगी। टीम रहीमाबाद रेंज तक बाघ की तलाश करेगी। इसके बाद लखनऊ की सीमा शुरू हो जाती है।
गुरुवार को कछौना के रामपुर गांव के पास बाघ के पंजे के निशान मिलने से हड़कंप मच गया था। वन विभाग से रेंजर रामचंद्र ने टीम के साथ बाघ को नदी के किनारे गांव में तलाश किया। ग्राम रामपुर में उसके पंजों के निशान मिले लेकिन बाघ नहीं मिला। रेंजर रामचंद्र ने बताया कि शुक्रवार को भी कल्याण मन के आगे निकली गोमती नदी के किनारे के गांव रामपुर, असैलिया, कटघरा, बैड़ारा आदि गांवों में कांबिंग की गई। यहां से सात किलोमीटर दूर सैफपुरखेड़ा के पास शुक्रवार दोपहर बाघ के पंजे के निशान दिखे। लेकिन उसके बाद कुछ पता नहीं चला।
उन्होंने बताया कि उनकी टीम लगातार कांबिंग कर रही है और रहीमाबाद रेंज तक कांबिंग करेगी। फिर उस रेंज को सतर्क कर दिया जाएगा। टीम में सुशील कुमार, आशीष कुमार, रविंद्र, अशोक कुमार, सुरेंद्र त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।