हरदोई। बेसिक शिक्षा विभाग में सच और सही की सीख देने वाले शिक्षकों के बीच फरेब और लालच का पाठ पढ़कर आए लोग भी दाखिल हो चुके हैं। 12 साल तक ऐसे गुरुओं से गुमराह होने के बाद अब विभाग उलझन में है।
शिक्षकों की बड़ी संख्या की आड़ में छिपे ऐसे शातिरों की तलाश करने का कोई आसान रास्ता विभागीय अधिकारियों के पास नहीं है, जबकि विभागीय लोगों का मानना है कि जांच और शिकायत के आधार पर ऐसे चंद लोग ही सामने आए हैं।
कई और भी फर्जी अभिलेखों पर नियुक्ति पाकर विभाग को चूना लगा रहे हैं। करीब 20 दिन पूर्व जिले के अलग-अलग स्कूलों में चार शिक्षक व दो अनुदेशकों के फर्जी अभिलेखों पर नियुक्ति के मामले बेपर्दा होने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग में खलबली मची हुई है।
खास बात यह है कि यह लंबे समय से विद्यालयों में शिक्षण कार्य कर रहे थे और विभाग इन्हें वेतन व भत्तों का भुगतान कर रहा था। इनमें तीन लोग वर्ष 2010 से और एक वर्ष 2015 से बेसिक शिक्षा विभाग से वेतन पा रहा था।
इनके अलावा दो शातिर अनुदेशक पद पर नियुक्ति पाकर मानदेय पा रहे थे। इनमें से एक ने वर्ष 2013 में और एक ने वर्ष 2015 में नियुक्ति पाई। इनके झूठ से पर्दा हटाने में विभाग को एक अरसा बीत गया।
पांच मामले एसटीएफ की जांच में, जबकि एक अन्य शिकायत पर सामने आया। विभाग ने सभी पर एफआईआर भी दर्ज करा दी, लेकिन इन प्रकरणों के सामने आने के बाद कई और शिक्षकों के फर्जी होने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
विभागीय अधिकारी भी इस बात को मानते हैं कि फर्जी या कूटरचित अभिलेखों पर नियुक्ति पाने के और प्रकरण भी हो सकते हैं, लेकिन शिक्षकों की इतनी बड़ी संख्या में उनकी तलाश कर पाना संभव नहीं होगा।
चुनाव बाद आगे बढ़ेगी रिकवरी की फाइल
चार शिक्षक व दो अनुदेशक पदों पर फर्जी अभिलेखों के आधार पर नौकरी पाए लोगों से विभाग रिकवरी के निर्देश दे चुका है, लेकिन उनसे विभाग का कितना पैसा वसूलना है, इसका आकलन चुनाव के बाद ही संभव हो सकेगा।
चुनावी व्यस्तता में विभागीय अधिकारी व संबंधित बीईओ भी उलझे हैं। चुनाव खत्म होने के बाद रिकवरी की राशि का आकलन शुरू हो जाएगा।
गैर जनपदों से कराया था तबादला
फर्जी अभिलेखों पर नियुक्ति के मामले से जुड़े शिक्षक व अनुदेशक गैर जनपदों से तबादले के बाद यहां आए थे। इनमें सीतापुर और लखीमपुर खीरी समेत पड़ोसी जनपदों से यहां तबादले हुए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इन लोगों ने विभाग को चकमा देने के लिए खुद नियुक्ति वाले जनपदों से ट्रांसफर कराकर यहां तैनाती ली है, ताकि उनकी हकीकत बेपर्दा न हो सके।
जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों की संख्या काफी है। सभी के अभिलेखों का नए सिरे से सत्यापन कराना बड़ी प्रक्रिया है। यदि कहीं से ऐसी कोई शिकायत मिलती है, तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
- वीपी सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी