हरदोई। मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को पैर में रॉड डालने के लिए किए जा रहे ऑपरेशन के दौरान टेबल पर ही महिला की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि मौत हो जाने के बाद चिकित्सक ने महिला को लखनऊ रेफर कर दिया। इधर, परिजनों के शोर मचाने पर कर्मचारियों ने शव मोर्चरी में रखवा दिया है।
बेहटा गोकुल थाना क्षेत्र के सुरजीपुर निवासी रामचंद्र परिवार के साथ पंजाब में एक ईंट-भट्ठे पर काम करते थे। वहां से वापस आते समय 16 मई को बुलंदशहर में दुर्घटना हो गई थी। इसमें रामचंद्र (50) उनकी पत्नी मंजू (45), पुत्र रामवीर (22), रवि (15), ललित (13) और आदेश (10) भी घायल हो गए थे। यह सभी लोग 17 मई को हरदोई मेडिकल कॉलेज आ गए थे। यहां से रामचंद्र, रामवीर और ललित को लखनऊ रेफर कर दिया गया था। मंजू का पैर टूट गया था। शुक्रवार को उसका ऑपरेशन होना था। पैर में रॉड डाली जानी थी।
मेडिकल कॉलेज के एक सर्जन ने उन्हें ऑपरेशन थिएटर पहुंचवाया और खुद भी पहुंच गए। परिजनों का दावा है कि ऑपरेशन के दौरान ही मंजू की मौत हो गई। इसके बाद अचानक ओटी से निकले स्वास्थ्य कर्मियों ने उसे लखनऊ ले जाने की सलाह दी। मौके पर मौजूद मंजू की सबसे बड़ी पुत्री रीता ने इलाज में लापरवाही करने की बात कही और शोर मचाने लगी। शोर सुनकर बड़ी संख्या में लोग मौके पर एकत्र हो गए।
ऑपरेशन के लिए 12,500 रुपये लिए थे, मौत हो गई तो वापस किए
रीता ने बताया कि ऑपरेशन के नाम पर चिकित्सक ने 12,500 रुपये लिए थे। कहा गया था कि जरूरी सामग्री बाजार से खरीदनी होगी। उनसे आरोप लगाया कि जब मंजू की मौत हो गई तो चिकित्सक ने रुपये वापस कर दिए। इलाज के लिए 2200 रुपये की दवाएं भी बाहर से मंगवाए जाने का आरोप मंजू ने लगाया।
वर्जन
रॉड व कुछ अन्य सामग्री के लिए 12,500 रुपये संभवत: लिए गए होंगे। ऑपरेशन के लिए कोई रुपये नहीं लिए गए हैं। शव मोर्चरी में रखवा दिया है। पोस्टमार्टम में मौत की वजह पता चलेगी। जो आरोप लगाए जा रहे हैं उनकी भी जांच करेंगे।
डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य मेडिकल कॉलेज