हरदोई। गर्मी और बारिश के मौसम में मच्छरों से जुड़ी बीमारियां बढ़ जाती हैं। मलेरिया इन दिनों वैसे ही काफी तेजी से फैल रहा है। मलेरिया का एक प्रकार फाल्सीपेरम काफी गंभीर और जानलेवा है। फाल्सीपेरम मलेरिया का खतरा इन दिनों काफी बढ़ रहा है। यह एक मस्तिष्क बुखार है, जिसका समय से इलाज न किया जाए तो जान भी जा सकती है।
जिले में इन दिनों बुखार लगातार पांव पसारता जा रहा है। लोग वायरल समझकर मेडिकल स्टोर से दवाएं खाते रहते हैं लेकिन जब शरीर लगातार कमजोर होता जाता है तो चिकित्सक के पास पहुंचते हैं। जांच कराने पर मलेरिया के लक्षण भी निकल आते हैं। जिले में रोजाना 10 से 12 मरीज मलेरिया के आ रहे हैं। मादा एनाफिलिज मच्छर काटने से प्लास्मोडियम नामक परजीवी शरीर पर हमला करता है। मेडिकल कॉलेज के जनरल मेडिसिन विभागाध्यक्ष विकास चंद्र विद्यार्थी बताते हैं कि मच्छर प्लास्मोडियम परजीवी से प्लास्मोडियम विवैक्स या प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम मलेरिया होता है।
इन दोनों में फाल्सीपेरम मलेरिया सबसे घातक है। यह मस्तिष्क मलेरिया के साथ किडनी और लाल रक्त कणिकाओं को संक्रमित करता है। इससे प्लेटलेट्स भी घटने लग जाती हैं। समय पर जांच और सही इलाज न होने पर यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है। जिले में फाल्सीपेरम मलेरिया का खतरा बढ़ रहा है और मरीज आने शुरू हो गए हैं।
फाल्सीपेरम मलेरिया है जानलेवा बीमारी
चिकित्सक विकास चंद्र विद्यार्थी ने बताया कि फाल्सीपेरम मलेरिया बहुत तेजी से शरीर में फैलता है। इलाज न कराया तो यह दिमाग, किडनी या फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है और जानलेवा भी हो सकता है। फाल्सीपेरम मलेरिया से सेरेब्रल मलेरिया (दिमाग में सूजन) की समस्या हो जाती है। यह मलेरिया बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए और भी ज्यादा खतरनाक होता है। इससे शरीर में खून की कमी हो सकती है।
फाल्सीपेरम मलेरिया के लक्षण
-मच्छर के काटने के नौ से 14 दिन बाद दिखते हैं।
-बार-बार तेज बुखार आना।
-कंपकंपी के साथ ठंड लगना।
-सिरदर्द और ज्यादा थकान होना।
-उल्टी होना या उबकाई आना।
-मांसपेशियों में दर्द होना।
-त्वचा और आंखों का पीला पड़ना।
-मलेरिया दिमाग तक पहुंचता है तो बेहोशी या दौरा।