महावीर जी झंडा मेला के अंतिम दिन गुरुवार की रात में
पुरानी गल्ला मंडी में हुए कवि सम्मेलन में दूर दराज से आए कवियों ने
काव्यपाठ कर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।
शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र
पर मीनाक्षी अग्निहोत्री ने माल्यार्पण व डा. सुमन दुबे ने सरस्वती वंदना
कर किया। रायबरेली से आए कवि नीरज पांडे ने पक्तियां पेश की-मां तो स्वयं
जीती जागती प्रतिमा है मां से बड़ा कोई भगवान नहीं होता। लखनऊ से आए कवि ने
पढ़ा, करते गुनाह है मगर कबूलते नहीं, जिस डाल पे खतरा हो कभी झूलते नहीं।
डा. अशोक अज्ञानी ने पढ़ा, जो नया चांद उगाने की बात करते हैं, वही तारों
को मिटाने की बात करते हैं। इलाहाबाद के कवि राधेश्याम भारती, सीतापुर के
जगजीवन मिश्र ने वीर रस की कविताएं पेश की। गाजीपुर से आईं कवयित्री डा.
सुमन दुबे ने पढ़ा, ना राधा से गरज उनको न ये घन श्याम बनते हैं, सुबह को
भूल बैठे हैं नशीली शाम बनते है, बड़ी मस्ती में रहते है बडे़ दीवाने लगते
है, यही बच्चे बड़े हो करके आशाराम बनते हैं।
राजस्थान से आए कवि गुरु
गोविंद पटवारी, जयपुर की कवयित्री डा. प्रतिभा शुक्ला, लखनऊ के डा.
सूर्यप्रसाद पांडे, मैनपुरी के डा. सतीश मधुप ने काव्य पाठ कर श्रोताओं को
खूब गुदगुदाया। अध्यक्षता डा. केबी शर्मा हाहाकारी उन्नाव ने की। इस मौके
पर पालिकाध्यक्ष शैलेश अग्निहोत्री ने अनिल लाइट, अतुल जायसवाल, पवन कुमार,
करन, शिवकुमार, अनिल सक्सेना, राम सिंह, मनोज आदि को सम्मानित किया।