हरदोई/बिलग्राम/हरपालपुर/बेहंदर। बैराजों के पानी से रामगंगा और गर्रा नदी के पानी बढ़ने के साथ ही क्षेत्र में फैलाव किया है। मंगलवार को रामगंगा नदी का पानी 15 सेंटीमीटर और गर्रा नदी का पानी 25 सेंटीमीटर बढ़ा है। दोनों नदियों के पानी ने खतरे के निशान को पार कर दिया है। बाढ़ के पानी का दायरा बढ़ने से एक और गांव प्रभावित होने से प्रभावित गांवों की संख्या 42 हो गई है। उन गांवों की करीब 38,000 से अधिक आबादी प्रभावित है, जबकि इन गांवों को मिलते हुए 103 गांवों की करीब 2,342 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फसलें बाढ़ से प्रभावित हुई हैं।
बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी से अब रामगंगा नदी और गर्रा नदी में पानी बढ़ना शुरू हुआ है, जिससे तहसील सदर के गांव भी प्रभावित होने शुरू हो गए हैं। गंगा नदी में हरिद्वार बैराज से 1,41,755 क्यूसेक और नरौरा बैराज से 1,28,716 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। पानी का आगे निकास ठीक होने से गंगा नदी के पानी में सोमवार की अपेक्षा 15 सेंटीमीटर की कमी आई है, हालांकि पानी खतरे के निशान 137.10 मीटर से अभी भी 20 सेंटीमीटर ऊपर 137.30 मीटर पर बना हुआ है। रामगंगा नदी के पानी खतरे के निशान 137.10 मीटर से ऊपर पहुंचा है और पानी 137.15 मीटर और गर्रा नदी का पानी खतरे के निशान 129.65 मीटर से 25 सेंटीमीटर ऊपर 129.90 मीटर पर पहुंच गया है। वहीं गर्रा नदी में पीलीभीत के ड्यूनी बैराज से 12,122 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। गर्रा और रामगंगा नदी के बाढ़ के पानी चौसार, बानामऊ, अलियापुर, बेहथर, बेहटा, टिलियापुर, शेखपुर, श्रीमऊ और मंसूरापुर आदि गांवों की फसले प्रभावित हुई हैं। रामगंगा और गर्रा नदी का पानी बढ़ने से बाढ़ के हालात बिगड़ने की आशंका बन गई है।
बिलग्राम क्षेत्र में भले ही गंगा नदी का पानी कम हुआ हो, लेकिन प्रभावित गांवों के लोगों की दिक्कतें कम नहीं हुई है। कटरी क्षेत्र में गंगा नदी के आसपास गांवों में परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। म्योरा, जरेला, पुनना पुरवा, चिरंजू पुरवा, तो दूसरी ओर कटरी परसोला के मजरों में भी पानी बढ़ा हुआ है। गांवों के किनारे गलियारे भरे हुए हैं। 37 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। बिजली व अन्य व्यवस्थाओं का संकट भी ग्रामीणों पर पड़ रहा है। पशुओं की समस्या को देखते हुए पशुपालक गांव के किनारे रास्तों में पशुओं को बांध रहे हैं। एसडीएम एन राम ने बताया कि प्रशासन लगातार राहत का प्रबंध कर रहा है।
हरपालपुर क्षेत्र में करीब एक सप्ताह तक गंगा नदी के रौद्र रूप से रामगंगा और गंभीरी नदियों में बाढ़ आ गई। जिससे कटियारी क्षेत्र के करीब 50 गांव लगातार प्रभावित हैं। रामगंगा नदी का पानी बढ़ने लगा है। सड़कों पर बाढ का पानी चलने से सड़क कट गई हैं। जिससे आवागमन प्रभावित है।
बेहंदर क्षेत्र में सई नदी के पानी से करीब 12 गांव की फसलें प्रभावित हैं। बाढ़ का पानी बढ़ने से प्राथमिक विद्यालय माखनखेड़ा और कंजोरा में दो दिन की छुट्टी कर दी गई है। बीईओ रतन लाल ने बताया कि बाढ़ के कारण विद्यालयों को बंद किया गया है।
मंडलायुक्ल ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का किया दौरा, ग्रामीणों ने भोजन पैकेट न मिलने की शिकायत की
बिलग्राम। मंडलायुक्त डॉ. रोशन जैकब ने मंगलवार को गंगा नदी की बाढ़ से प्रभावित गांवों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को सुना। अधिकारियों को राहत कार्यों को त्वरित गति से करने के निर्देश दिए। मंडलायुक्त मोटरबोट से कटरी बिछुइया, चिरंजीवपुरवा, घासीरामपुरवा आदि बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों से बातचीत की। लोगों के रहने, खाने और चिकित्सा व्यवस्था की जानकारी ली। ग्रामीणों और महिलाओं ने मंडलायुक्त से गंगा नदी के किनारे बांध, राजघाट तक जाने वाले मार्ग और पुलिया बनवाने की मांग की। कहा कि भविष्य में आने वाली बाढ़ से राहत मिल सकेगी। मंडलायुक्त ने मक्कूपुरवा गांव में लोगों से मुलाकात की और राहत सामग्री के वितरण का जायजा लिया। ग्रामीणों ने खाद्य पैकेट न मिलने की शिकायत की। मंडलायुक्त ने निर्देश दिए कि जिनके घरों में पानी भरा है, उन्हें तत्काल पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जाए। डीएम अनुनय झा ने एसडीएम एन राम को प्रभावित परिवारों को दिन में दो समय भोजन देने के निर्देश दिए।