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Hardoi News: खुद को डिप्टी सीएम का करीबी बताकर अभियंताओं को दबाव में रखता था फर्म का प्रोपराइटर

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हरदोई। जनपद के मार्ग निर्माण में अधोमानक सामग्री का इस्तेमाल होने की जानकारी पर भी चुप्पी साधे रहना अभियंताओं के लिए मुसीबत का सबब बन गया।
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दरअसल, कार्रवाई की जद में आई दो फर्माें के प्रोपराइटर खुद को एक डिप्टी सीएम का बेहद करीबी बताकर हर किसी पर रौब झाड़ते थे। प्रोपराइटर के रसूख का आलम यह था कि न तो तत्कालीन अधीक्षण अभियंता ने और न ही अधिशासी अभियंताओं ने कभी निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर नोटिस जारी किया। प्रोपराइटर के रसूख के आगे अवर अभियंताओं की बोलती तक नहीं निकलती थी।
लखनऊ-पलिया राष्ट्रीय राजमार्ग से सांडी शाहाबाद मार्ग को जोड़ने वाले रद्धेपुरवा सकतपुर मार्ग के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण का कार्य 58,97,38,000 रुपये की लागत से कराया जाना था। सिंगल लेन की इस सड़क को सात मीटर चौड़ा किया जा रहा था। उक्त कार्य मेसर्स प्रोग्रेसिव कंस्ट्रक्शन कंपनी के पास था। कंपनी का प्रोपराइटर खुद को सूबे के एक डिप्टी सीएम का न सिर्फ घनिष्ट बल्कि रिश्तेदार तक बताकर पूरे विभाग पर रौब झाड़ता था।
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उसके रसूख के आगे अधीक्षण अभियंता से लेकर लिपिक तक खामोश रहते थे। निर्माण कार्य देरी से शुरू करने के बाद भी विभाग के स्थानीय अभियंता कभी उसे एक नोटिस तक न दे पाए। जांच में निर्माण सामग्री का नमूना फेल हो गया, लेकिन स्थानीय अभियंता रसूखदार ठेकेदार के आगे नतमस्तक ही नजर आते थे। इसकी वजह न सिर्फ ठेकेदार का रसूख बल्कि कमीशन का खेल भी था। इसी फर्म के प्रोपराइटर के करीबी की फर्म मेसर्स सायरस इंफ्रा नाम से है। इस फर्म ने हरदोई-सांडी मार्ग के नवीनीकरण का काम किया था। इसमें लगभग तीन करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

चारों निर्माण कार्याें में यह मिली गड़बड़ियां
-डेंस ग्रेडेड विटूमिन मैकेडम (डीबीएम) का घनत्व (डेंसिटी) 95 से 100 फीसदी के बीच आना चाहिए था। जांच में 95 से कम निकला।
-बिटूमिन कंक्रीट (बीसी) का घनत्व भी 95 से 100 फीसदी के बीच आना चाहिए था, लेकिन जांच में यह भी कम मिला।
-बिटूमिन यानी डामर (तारकोल) 4.5 फीसदी होना चाहिए। जांच में यह भी कम निकला।
-सीमेंट एक फीसदी और इमलसन 3.5 फीसदी होना चाहिए था। इसे आईटीएस यानी इनडायरेक्ट टेन साइड स्ट्रेंथ कहते हैं। न्यूनतम 225 किला पास्कल एरिया होना चाहिए, लेकिन जांच में यह भी कम निकला।


पूरे विभाग को भारी पड़ गई आबकारी मंत्री की नाराजगी
लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं और ठेकेदारों को आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल की नाराजगी भारी पड़ गई। दरअसल, क्षेत्र भ्रमण पर निकले आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल से 17 सितंबर को ग्रामीणों ने शिकायत दर्ज कराई थी। ग्रामीणों ने कहा था कि रद्धेपुरवा सकतपुर मार्ग के निर्माण में मनमानी की जा रही है। कई-कई दिनों तक कोई काम ही नहीं होता। इससे खफा नितिन अग्रवाल ने 19 सितंबर को मुख्यमंत्री से पूरे मामले की शिकायत कर दी। मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दे दिए। एक अक्तूबर को विस्तृत जांच करने के लिए अभिलेख तलब कर लिए गए। इसके बाद धीरे-धीरे कार्रवाई चलती रही और जब मुख्यमंत्री तक अभियंताओं और ठेकेदारों की मनमानी पहुंची तो पूरे लोक निर्माण विभाग के लिए मुसीबत हो गई।
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पहले कभी नहीं हुई इतनी बड़ी कार्रवाई
जनपद के इतिहास में लोक निर्माण विभाग में एक साथ इतनी बड़ी कार्रवाई पहले कभी नहीं हुई। पहले भी निर्माण कार्याें में अनियमितताओं की शिकायतें होती रहती थीं, लेकिन बाद में सब मैनेज हो जाता था। बसपा सरकार में वर्ष 2008 में हरदोई-बिलग्राम मार्ग को लेकर हुई कार्रवाई में दो तत्कालीन अधिशासी अभियंता समेत छह अभियंताओं को निलंबित किया गया था। इसके बाद सपा सरकार में एक अधिशासी अभियंता और दो अवर अभियंताओं को भी निलंबित किया गया था। यह पहला मौका है, जब एक साथ 16 अभियंताओं पर कार्रवाई हुई है।
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