हरदोई। मैं भी जिंदा हूं का प्रणाम पत्र देने में जिला प्रदेश में अव्वल स्थान पर है। सरकारी विभागों से सेवानिवृत कर्मियों को कोषागार के माध्यम से पेंशन दी जा रही है। पेंशनर्स को साल में एक बार जीवित होने का प्रमाण पत्र देना अनिवार्य है। जीवित होने का प्रमाण पत्र न दिए जाने की दशा में पेंशन भुगतान पर रोक लगा दी जाती है।
जिले में करीब 16,000 से अधिक बुजुर्गों को कोषागार के माध्यम से पेंशन दी जा रही है। शासन ने पेंशनर्स को जीवित होने का प्रमाण पत्र दिए जाने के लिए ई-जीवन प्रमाण पत्र पर ऑनलाइन सुविधा दी गई है। इससे पेंशनर्स कहीं से भी खुद के जीवित होने का प्रमाण पत्र दे सकते हैं। जिससे पेंशनर्स को कोषागार कार्यालय की दौड़ भाग नहीं लगानी पड़ती है। पेंशनर्स के जीवित होने के प्रमाण कोषागार के माध्यम से प्रमाणित कर दिया जाता है और पेंशनर्स को पेंशन मिलती रहती है।
कोषागार के माध्यम से विभिन्न सरकारी विभागों के सेवानिवृत कर्मचारियों-अधिकारियों को पेंशन मिल रही है। जिले में करीब 16,000 से अधिक पेंशनर्स कोषागार से पेंशन दी जा रही है। पेंशनर्स का साल में एक बार सत्यापन होता है। इसके लिए शासन ने ई-जीवन प्रमाण पत्र की व्यवस्था दी है। इसमें पेंशनर्स अपनी पेंशन के ब्योरे के साथ ई-जीवन प्रमाण पत्र के लिए आईरिस, चेहरा और अंगूठा लगाकर अपना पत्र ऑनलाइन अपलोड कर रहे हैं। कोषागार के पोर्टल पर सत्यापन आने पर प्रमाणित कर दिया जाता है। -डॉ. अनुराग द्विवेदी, वरिष्ठ कोषाधिकारी