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‘अष्टांगिक योग से देश बन सकता विश्व गुरु’

Mon, 13 Apr 2015 12:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
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योग द्वारा आत्मशुद्धि होने में पतंजलि के अष्टांगिक योग को अपनाकर भारत पुन: विश्व गुरु के स्थान को प्राप्त कर सकता है। भारतीय योग संस्थान दिल्ली की जनपदीय शाखा में रविवार को हुए स्थापना दिवस समारोह में आचार्य सत्यवीर प्रकाश आर्य ने यह बात कही।
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उन्होंने कहा कि योग द्वारा सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। रजनीकांत पांडे ने कहा कि योग हमारे ऋषियों की धरोहर है, इसे मानव सेवा के लिए ही अपनाना चाहिए। योग को व्यापार न बनाया जाए। गायत्री शक्ति पीठ के संस्थापक रविकांत त्रिपाठी ने योग की प्रभावी सफलता को व्यापक आहार शुद्धि पर बल दिया।

उन्होंने व्यापक आहार शुद्धि को स्पष्ट करते हुए ज्ञानेंद्रियों आर कर्मेन्द्रियों द्वारा आहरित वस्तुओं और तत्वों की शुद्धता पर विशेष बल दिया। योग संस्थान के प्रधान रामरूप यादव ने संस्थान का परिचय देते हुए संस्थान की निशुल्क मानव सेवाओं की प्रशंसा की और लोगों से संस्थान के साथ जुड़कर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने का आह्वान किया।
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सरस्वती वंदना मनोज अग्रवाल व उनके साथियों के द्वारा कराई गई। योगाभ्यास में ऊं ध्वनि, गायत्री मंत्री, त्रिकोण आसन, ऊष्ट्रासन, भुजंगासन, पादोत्तानासन व हंसी के आसन के साथ ही प्राणायाम वाईपी गुप्ता द्वारा कराया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सीमा गुप्ता ने संस्थान के बाबत बताया। इस मौके पर विजय भाई, सरोज श्रीवास्तव, सत्यदेव गुप्ता, पुष्पेंद्र, आनंद अग्रवाल, किशनचंद्र अग्रवाल, आरडी पाल आदि मौजूद थे।
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