राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत उच्चीकृत
स्कूलों का लाभ स्थानीय विद्यार्थियों को नहीं मिल पा रहा है। जिले में
संचालित स्कूलों में एक ही टीचर तैनात हैं। वह भी इन दिनों मूल्यांकन कार्य
में व्यस्त हैं। इससे अधिकतर स्कूलों में ताला नहीं खुल सका है। इससे
विद्यार्थियों को निजी स्कूलों में प्रवेश लेना पड़ रहा है।
ज्ञात हो कि
सर्व शिक्षा अभियान की तर्ज पर माध्यमिक स्कूलों में संसाधनों को मुहैया
कराने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने को वर्ष 09 में जिले में राष्ट्रीय
माध्यमिक शिक्षा अभियान शुरू हुआ था। प्रथम चरण में जिले के चार जूनियर हाई
स्कूलाें को उच्चीकृत कर कक्षा दस तक की कक्षाएं शुरू की गई।
इनमें जूनियर
हाईस्कूल गोपामऊ, सारीपुर, छछेटा, सकरा और अंर्धरा को शामिल किया गया। इन
स्कूलों के उच्चीकरण के साथ ही कक्षा नौ की कक्षाएं शुरू कर दी गई, पर
इनमें टीचरों की तैनाती नहीं हुई। विगत दो शिक्षा सत्रों से एक ही टीचर
तेरह विषयों को पढ़ा रहे है।
हैरत की बात तो यह है कि इन विद्यालयों के
विद्यार्थी एक टीचर के सहारे ही बोर्ड की परीक्षा भी उत्तीर्ण कर चुके है। इन
स्कूलों के लिए 56 लाख की लागत से विद्यालय भवन बनवाए गए हैं और प्रति
वर्ष विद्यालयोें को उच्चीकृत किया गया। अब जिले में अब तक 42 विद्यालयों
को उच्चीकृत कर दिया गया है।
उधर, जिले में वर्तमान शिक्षा सत्र में
उच्चीकृत किए गए सभी राजकीय हाईस्कूल में किराए के टीचर पढ़ा रहे हैं।
शुरुआत में उच्चीकृत विद्यालयों में दो से तीन टीचर हैं। अन्य सभी
विद्यालयों में एक ही टीचर सारे विषय पढ़ा रहे हैं। इनमें राजकीय स्कूलों
के टीचरों को इन विद्यालयों मेें संबद्ध किया गया है।
उधर, राजकीय उच्चीकृत
स्कूलों में संबद्ध टीचर तीस मार्च से मूल्यांकन कार्य में लगे हुए हैं,
जबकि एक अप्रैल से शिक्षा सत्र शुरू हो चुका है। स्कूल में टीचर न होने से
इन विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया ठप पड़ी है। अधिकतर स्कूलों के ताले
नहीं खुल रहे हैं।