परिषदीय स्कूलों में मिड-डे मील योजना के तहत
विद्यार्थियों को दिए जा रहे पौष्टिक आहार से विद्यार्थियों के स्वास्थ्य
पर पड़ रहे असर की जानकारी करने वाले उपकरण विद्यालयों में धूल खा रहे हैं।
लाखों रुपये का व्यय होने के बाद पूरी कार्रवाई को रद्दी की टोकरी में डाल
दिया गया है।
इस बाबत विभागीय जिम्मेदार आंखें मूंदे हुए हैं। जिले के
परिषदीय विद्यालयों में मिड-डे मील योजना के तहत जिले के 2847 प्राथमिक और
1029 जूनियर हाईस्कूल में बच्चों को पका पकाया भोजन उपलब्ध कराया जा रहा
है। इनमें से 3513 विद्यालयों में 300 रुपये की लागत से वेइंग मशीन खरीदी
गई थी।
जिस पर विभाग की ओर से 10,53,900 रुपये व्यय हुआ था, मगर यह सभी
मशीन कबाड़ में तब्दील हो गई। इससे जहां विद्यार्थियों का स्वास्थ्य
परीक्षण नहीं हो पा रहा, वहीं लाखोें रुपये बर्बाद हो गए हैं। उधर, मिड-डे
मील योजना के तहत विद्यालयोें को वेइंग मशीन खरीदने के निर्देश ग्राम
शिक्षा समिति को दिए गए थे और उसके लिए धनराशि भी विद्यालयों के खाते में
भेजी गई थी।
पर, विभागीय मिली भगत से एक ही फर्म से विद्यालयों में
वेइंग मशीन की आपूर्ति करा दी गई। इससे मशीन की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि
वह कुछ दिन में ही खराब हो गई। इससे उनका प्रयोग नहीं हो पा रहा है। उधर,
मिड-डे मील योजना के तहत बच्चों को मानक के अनुरूप प्रतिदिन मीनू के अनुसार
पौष्टिक भोजन मुहैया कराया जा रहा है।
मिड-डे मील योजना के तहत बच्चों को
दिए जा रहे भोजन का असर विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर किस प्रकार पड़ रहा
है। इसके जांच के लिए विद्यालय में हाइट नापने और वेट करने की व्यवस्था की
गई थी। विद्यालय के टीचर को सभी बच्चों का परीक्षण कर चार्ट तैयार करना था
और प्रतिमाह उसको भरना था ताकि विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के विषय में
जानकारी प्राप्त की जा सके।