बेहटा गोकुल। लगभग आठ माह तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद 14 दिन पहले घर आए बीमार युवक ने रविवार रात खुद को कमरे में बंद कर लिया। छोटे सिलिंडर और चूल्हे से खुद को आग लगा ली। कमरे से गैस की गंध आने और धुआं निकलने पर परिजनों ने दरवाजा तोड़ा, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। घटना रविवार देर रात की है।
दलेलनगर के मजरा चिमनी निवासी नर्वेश (25) गुजरात की एक फैक्टरी में काम करते थे। बड़े भाई कौशल के मुताबिक, तीन नवंबर 2024 को सांडी-शाहाबाद मार्ग पर सड़क हादसे में नर्वेश के दोनों पैरों में गंभीर चोटें आईं थीं। नर्वेश का इलाज लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल से चल रहा था। संक्रमण होने की वजह से उनका एक पैर काट दिया गया था।
29 सितंबर को ही वह अस्पताल से वापस गांव आए थे। कौशल ने बताया कि रविवार दोपहर नर्वेश टेंपो से शराब के ठेके की ओर गया था। देर शाम आकर कमरे में चला गया। कमरे में गैस चूल्हा, पांच लीटर का गैस सिलिंडर, कपड़े और रजाई रखे थे। देर रात कमरे से गंध आने पर कौशल और उनके पिता हेतराम कमरे की तरफ गए।
दरवाजा बंद होने पर इन लोगों ने दरवाजा तोड़ दिया। नर्वेश को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने छोटा सिलिंडर कमरे से बाहर निकालकर फेंक दिया। नर्वेश चार भाइयों और दो बहनों में पांचवें नंबर पर थे। अविवाहित थे। थानाध्यक्ष धर्मेंद्र गिरी ने बताया कि प्राथमिक जांच में मामला खुदकुशी का लग रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।