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Hardoi News: तय अवधि बीती, परियोजनाएं अधूरी और लागत भी बढ़ी

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हरदोई। शासन की शीर्ष प्राथमिकता में स्वास्थ्य और शिक्षा शामिल है। यहां स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग की परियोजनाओं को कार्यदायी संस्थाएं तय समय में पूरा नहीं करा पाई हैं। परियोजनाएं अधूरी हैं और समय से काम न होने से इनकी लागत में बढ़ोतरी से सरकार के खजाने पर भी बोझ बढ़ा है। प्राविधिक शिक्षा विभाग की ओर से कार्यदायी संस्था उप्र राजकीय निर्माण निगम लि. ने राजकीय पॉलिटेक्निक भवन को 14 साल में भी पूरा नहीं करा पाया है।
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उप्र राजकीय निर्माण निगम लि. की ओर से चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, प्राविधिक शिक्षा, राजस्व एवं आपदा विभाग, यूपी सिडको की ओर से अल्पसंख्यक एवं वक्फ विभाग के कराए जा रहे कामों को तय समय सीमा में पूरा नहीं कराया जा सका है। इससे एक तो परियोजना समय से पूरी नहीं हो सकी है और दूसरे काम समय से पूरा न होने से लागत में भी बढ़ोतरी हुई है। लोकसभा चुनाव की अधिसूचना के बाद निर्माण कार्यों की प्रगति की स्थिति में उप्र राजकीय निर्माण निगम लि. की ओर से चिकित्सा एवं परिवार कल्याण विभाग के कामों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चौसार का काम टेंडर के अनुसार 30 अप्रैल 2024 को पूरा हो जाना चाहिए था।
प्रगति रिपोर्ट के अनुसार काम अभी 80 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है। स्वास्थ्य केंद्र की वर्ष 2021 में स्वीकृति के समय लागत 7.69 करोड़ थी। काम समय से न होने से लागत में बढ़ोतरी हुई और पुनरीक्षित लागत 9.61 करोड़ हो गई है। संडीला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर 50 शैया का फील्ड हाॅस्पिटल का काम 31 दिसंबर 2013 तक पूरा होना था, लेकिन यह काम अभी तक 65 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है। इसकी लागत 3.05 करोड़ है।
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प्राविधिक शिक्षा विभाग के राजकीय पॉलिटेक्निक संडीला का काम 31 मार्च 2014 को पूरा हो जाना चाहिए था। यह काम भी पूरा नहीं हो पाया और अब तक 95 प्रतिशत ही काम हो पाया है। वर्ष 2010 में राजकीय पॉलिटेक्निक की लागत 6.45 करोड़ स्वीकृत हुई थी। 14 साल में काम पूरा न हो पाने से पुनरीक्षित होकर यह लागत 16.99 करोड़ हो गई है। ऐसे ही उप्र राजकीय निर्माण निगम लि. की ओर से राजस्व एवं आपदा विभाग की ओर से बनवाए जा रहे शाहाबाद तहसील के अनावसीय भवन का काम भी 31 मार्च 2024 तक पूरा होना था, लेकिन यह भी छह साल में पूरा नहीं हो पाया है। अनावसीय भवन की लागत वर्ष 2017 में 3.40 करोड़ स्वीकृत हुई थी जो पुनरीक्षत होकर 8.70 करोड़ हो गई है।
कार्यदायी संस्था यूपी सिडको की ओर से अल्पसंख्यक एवं वक्फ विभाग की राजकीय आईटीआई का निर्माण वर्ष 2022 में स्वीकृत हुआ था और यह काम तीन जनवरी 2024 तक होना था। लागत में तो इसमें बढ़ोतरी नहीं हुई, लेकिन काम अभी तक 90 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है।
लोकसभा चुनाव की अधिसूचना समाप्त हो गई है। निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा गहराई से की जाएगी। सीएम डैशबोर्ड पर भी कार्यदायी संस्थाओं की प्रगति की स्थिति रहती है। इससे समय से काम न कराने की कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारियों से कारणों की जानकारी ली जाएगी और लापरवाही पर जिम्मेदारी तय की जाएगी। मुख्यमंत्री की ओर से स्वयं समीक्षा की जा रही है, ऐसे में सभी कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारियों को कार्यों को तय समय में पूरा कराने के लिए आदेश जारी किए जाएंगे। -मंगला प्रसाद सिंह, जिलाधिकारी
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