नुमाइश मैदान में रामलीला का मंचन करते कलाकार।
- फोटो : नुमाइश मैदान में रामलीला का मंचन करते कलाकार।
फोटो-20 -नुमाइश मैदान में रामलीला का मंचन करते कलाकार। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। नुमाइश मैदान में शुक्रवार को मुनि आगमन लीला का मंचन किया गया। 99 यज्ञ पूर्ण करने के बाद 100 वां यज्ञ ऋषि विश्वामित्र का राक्षस पूर्ण नहीं होने दे रहे थे। यज्ञ को पूर्ण करने के लिए ऋषि राजा दशरथ के पास गए। राम-लक्ष्मण को यज्ञ की रक्षा के लिए ले आए।
जब मुनि जप,यज्ञ और योग करते थे तो मारीच और सुबाहु और ताड़का उसमें बाधा डालते थे। ऋषि विश्वामित्र राजा दशरथ के पास यज्ञ की रक्षा के लिए राम-लक्ष्मण को मांगने गए। मुनि ने राजा दशरथ को बताया कि उन्होंने 99 यज्ञ पूर्ण कर लिए हैं लेकिन 100 वां यज्ञ राक्षस पूर्ण नहीं होने दे रहे हैं।
यज्ञ की रक्षा के लिए राम-लक्ष्मण को भेजने को कहा। दशरथ ने ऋषि की याचना को अस्वीकार कर दिया। कहा कि मैं अपने प्राण तक दे सकता हूं। प्राणों से प्रिय राम को नहीं भेज सकता। कहां अत्यंत डरावने और क्रूर राक्षस और कहां परम किशोर अवस्था के सुकुमार यह पुत्र। तब वशिष्ठ जी ने राजा को बहुत प्रकार से समझाया, जिससे राजा का संदेह दूर हो जाता है। राम-लक्ष्मण को ऋषि को सौंप देते हैं। गोविंद गोपाल लीला संस्थान के स्वामी कन्हैयालाल दत्तात्रेय के निर्देशन में कलाकारों ने लीला का मंचन किया।