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Hardoi News: जिप्सम के घोटाले में भूमि संरक्षण अधिकारी पर कार्रवाई की संस्तुति

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-एक कृषि फार्म से दूसरे कृषि फार्म तक भेजे जाने के दौरान रास्ते में ही मिट्टी के मोल बिक गई थी जिप्सम
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-खुद को बचाने के लिए डंपर चालक और प्राविधिक सहायक पर दर्ज करा दिया था मामला
आनंद मिश्रा
हरदोई। सरकारी कृषि फार्म की भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए मिली सरकारी जिप्सम से जेब की हरियाली बढ़ाने की कवायद का खुलासा हुआ है। खास बात यह है कि जिप्सम के खेल में जिन भूमि संरक्षण अधिकारी ने अपने प्राविधिक सहायक और डंपर चालक पर प्राथमिकी दर्ज करा खुद का पल्ला झाड़ा था, वह पूरे मामले में लपेटे में आ गए हैं। विस्तृत जांच रिपोर्ट मिलने के बाद भूमि संरक्षण अधिकारी प्रथम इंद्रसेन नाथ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति जिलाधिकारी ने कृषि उत्पादन आयुक्त से की है।

जिले में चार बड़े सरकारी कृषि फार्म हैं। प्रत्येक फार्म लगभग 300 हेक्टेयर का है। विभागीय भाषा में इसे कृषि प्रक्षेत्र कहते हैं। इन फार्माें में कृषि विभाग विभिन्न फसलों के बीज तैयार करता है। बीज उत्पादन का कार्य बेहतर ढंग से करने के लिए यहां ऊसर सुधार के कार्य किए जाने की योजना बनी थी। इसी योजना के तहत कुल 8971.49 मीट्रिक टन जिप्सम की आपूर्ति जिले को की गई थी। भूमि संरक्षण अधिकारी प्रथम इंद्रसेन नाथ काे लगभग 4146 मीट्रिक टन और भूमि संरक्षण अधिकारी द्वितीय निधी राठौर को 4842 मीट्रिक टन जिप्सम उपलब्ध कराई गई थी। आपूर्ति कर्ता फर्म ने भूमि संरक्षण अधिकारी द्वितीय को आवंटित क्षेत्र जैतपुर तृतीय पर आपूर्ति कर दी थी, जबकि यह आपूर्ति मोहम्मदपुर और उपाध्याय खेड़ा फार्म में होनी थी। जैतपुर में उतरी जिप्सम को डंपर से मोहम्मदपुर और उपाध्याय खेड़ा शिफ्ट किए जाने का काम हो रहा था। इस दौरान बड़े पैमाने पर जिप्सम का उपयोग मिट्टी भराव के लिए होने का मामला सामने आया था।
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बिरईखेड़ा निवासी कृष्णपाल के निर्माणाधीन मकान और गोशाला के पास लगभग 31 मीट्रिक टन जिप्सम पड़ी मिली थी। इसके अलावा भी बड़े पैमाने पर जिप्सम इधर-उधर बिखरी हुई थी। अमर उजाला में इसको लेकर खबर प्रकाशित हुई तो जिलाधिकारी अनुनय झा ने जांच के आदेश दिए। खुद को बचाने के लिए इंद्रसेन नाथ ने प्राविधिक सहायक देवेंद्र सिंह और डंपर चालक वसीक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दी थी। कुछ और सूचनाएं मिलने पर डीएम ने उप कृषि निदेशक डॉ. राजेश कुमार और जिला कृषि अधिकारी डॉ. सतीश पाठक से जांच कराई। जांच में पूरे मामले में दोनों ही भूमि संरक्षण अधिकारियों को लापरवाही बरतने का आरोपी पाया गया है। जिप्सम के उठान से लेकर इसे उतारे जाने तक के कार्य की कोई निगरानी ही दोनों अधिकारियों ने नहीं की। जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम अनुनय झा ने भूमि संरक्षण अधिकारी प्रथम इंद्रसेन नाथ समेत अन्य जिम्मेदारों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की संस्तुति कृषि उत्पादन आयुक्त से की है।

किसान को चाहिए थी मिट्टी, जिप्सम दे दी
बिरईखेड़ा निवासी कृष्णपाल खेती करते हैं। उनका मकान निर्माणाधीन है। मकान में भराव के लिए मिट्टी की जरूरत थी। इसकी चर्चा उन्होंने अतरौली के पास ढाबा चलाने वाले अपने एक परिचित से की। ढाबे पर अक्सर डंपर चालक खाना खाते हैं तो डंपर चालकों से ढाबा चालक की जान पहचान थी। ढाबा संचालक ने कृष्णपाल की मुलाकात वसीक से करा दी। 3500 रुपये में चार डंपर मिट्टी डालने का सौदा तय हुआ। मिट्टी की जगह यहां सरकारी जिप्सम डाल दी गई। कृष्णपाल ने दो डंपर जिप्सम के बाद इसे खराब बताते हुए अच्छी मिट्टी देने के लिए कहा और बाकी की दो डंपर जिप्सम नहीं ली।
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3500 रुपये में बेची सवा लाख से ज्यादा की जिप्सम

मौके पर 31 मीट्रिक टन जिप्सम बरामद हुई थी। यह वह जिप्सम थी जिसे मिट्टी बताकर किसान के यहां भराव के लिए डाला गया था। इसकी कीमत लगभग 1.34 लाख रुपये है जबकि यह जिप्सम सिर्फ 3500 रुपये में दे दी गई।


जांच आख्या शासन भेज दी गई है। शासन स्तर से ही भूमि संरक्षण अधिकारी समेत अन्य जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी। -अनुनय झा, डीएम
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